वास्तविक जीवन क्या है रोटी या ध्यान शक्ति, विचार करें

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Thursday, December 18, 2014-10:56 AM

गीता में भगवान कहते हैं की जो कर्म में अकर्म को देखता है और अकर्म में कर्म को देखता है वह संपूर्ण कर्मों को करने वाला होता है। अकर्म में से जो कर्म फलित होता है वह वास्तव में बहुत निर्दोष और प्राणवान कर्म होता है।

महात्मा बुद्ध विहार कर रहे थे साथ में एक शिष्य था उसने पूछा," ध्यान शक्ति क्या है? मैं जानना चाहता हूं।"

बुद्ध ने सुना उत्तर नहीं दिया और आगे बढ़ गए मार्ग में कुंआ आया। एक यात्री आ रहा था। वह प्यासा था। उसने देखा कुएं के पास एक बाल्टी पडी थी। उसने उस बाल्टी को कुएं में डाला। डोरी खींची बाल्टी ऊपर आई पर उसमें पानी नहीं था। फिर उसे कुएं में डाला ऊपर खींचा वह खाली ऊपर आई वह पानी नहीं पी सका। उसकी प्यास वैसी ही बनी रही। बाल्टी की पैंदी में छेक था। जितना पानी भरता वह ऊपर आते-आते खाली हो जाता। बुद्ध आगे चले। कुछ ही दूरी पर दूसरा कुंआ दिखा। वहां भी डोर से बंधी बाल्टी पड़ी थी। एक प्यासा पथिक आया पानी पीया प्यास बूझ गई।

बुद्ध ने शिष्य से कहा," वत्स!  तुम जानना चाहते थे न ध्यान की शक्ति क्या है? जो ध्यान नहीं करता वह खाली रहता है। कभी नहीं भरता वह खाली रहता है और फूट जाता है। जो कुछ अंदर आता है वह सारा का सारा निकल जाता है जो ध्यान करता है जितना अंदर आता है वह उतना ज्यादा बढ़ता है।"

यह है ध्यान का महत्व तुम्हारी कितनी ही शक्तियां हैं शरीर में मस्तिष्क में उनके विकास का मार्ग है ध्यान। ध्यान के बिना उनको विकसित नहीं किया जा सकता। ध्यान साधना का मार्ग शक्तियों के विकास का मार्ग है। हम रोटी का मूल्यांकन करते हैं क्योंकि रोटी हमारा जीवन है परंतु जो सच में जीवन है उसका हम कभी मूल्यांकन नहीं करते वह है प्राण ध्यान जोकि जीवन को प्राण ऊर्जा से भर देता है।

- सरोज बाला





 

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