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आज खुलेंगे स्वर्ग के द्वार, बैकुंठ धाम में अपना स्थान बनाने के लिए करें कुछ खास

  • आज खुलेंगे स्वर्ग के द्वार, बैकुंठ धाम में अपना स्थान बनाने के लिए करें कुछ खास
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Sunday, November 13, 2016-9:10 AM

13 नवंबर, रविवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है, जिसे बैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन बैकुंठाधिपति भगवान श्री हरि विष्णु का संपूर्ण विधि विधान से पूजन किया जाता है।


देवशयनी एकादशी पर संसार के पालनहार भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के घर विश्राम करने चले जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल लोक में बलि के महल में निवास करते हैं। इन चार महीनों (चातुर्मास) में भगवान शिव की शक्तियां बढ़ जाती हैं क्योंकि श्री हरि सृष्टि का संचालन उन्हें सौंप देते हैं। 

धार्मिक कार्यों का आधार भगवान विष्णु ही हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने से श्री हरि का आशीर्वाद स्वयं ही प्राप्त हो जाता है। एक पूजा से प्राप्त होता है दो देवों का वरदान। कल देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जाग गए हैं। अव भगवान शिव सृष्टि का भार पुन: भगवान विष्णु को सौंप देंगे। धरतीवासियों के लिए इस दिन पूजन व व्रत करने का विधान है।


व्रत करने के नियम

* दैनिक कार्यों से निवृत होकर सारा दिन व्रत करें।

 

* रात को भगवान विष्णु का कमल के फूलों से पूजन करें।

 

* भगवान शिव की पूजा के संदर्भ में कहा गया है-
विना यो हरिपूजां तु कुर्याद् रुद्रस्य चार्चनम्।
वृथा तस्य भवेत्पूजा सत्यमेतद्वचो मम।।

रात को जागरण करके कार्तिक पूर्णिमा (14 नवंबर) की प्रभात को रूद्राभिषेक करके   ब्राह्मणों को भोजन और क्षमता के अनुसार दक्षिणा दें, फिर परिवार सहित भोजन खाएं।


बैकुंठ चतुर्दशी की कथा
नारद जी वीणा बजाते हुए नारायण-नारायण बोलते हुए बैकुंठ धाम पंहुचते हैं। भगवान श्री हरि विष्णु उनको सम्मानपूर्वक आसन देते हैं और आने का कारण पूछते हैं।


नारद जी कहते हैं, "हे प्रभु! मैं पृथ्वी लोक से आ रहा हूं। आपका नाम कृपानिधान है, इस नाम को लेने वाला भवसागर से पार पाता है लेकिन सामान्य नर-नारी कैसे भक्ति कर मुक्ति पा सकते हैं।"


श्री हरि ने कहा," कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी बैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जानी जाएगी। इस दिन जो कोई नियम से व्रत और पूजन करेगा, उनके लिए स्वर्ग के द्वार सदा खुले रहेंगे। मरणोपरांत वह बैकुंठ धाम को प्राप्त करेगा।

 
उन्होंने अपने द्वारपाल जय-विजय को आदेश देते हुए कहा कार्तिक चतुर्दशी को स्वर्ग के द्वार खुले रहेंगे।


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