ज्योतिष की राय: 12 जुलाई से 16 जुलाई नक्षत्रों के प्रभाव से रहें सावधान!

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Wednesday, July 12, 2017-10:45 AM

भारतीय ज्योतिष के अनुसार जब चन्द्रमा कुंभ और मीन राशि पर रहता है तब उस समय को पंचक कहते हैं। यानी घनिष्ठा से रेवती तक जो पांच नक्षत्र (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उतरा भाद्रपद एवं रेवती) होते हैं, उन्हे पंचक कहा जाता है। कुछ विद्वानों ने इन नक्षत्रों को अशुभ माना है इसलिए पंचक में कुछ कार्य विशेष नहीं किए जाते हैं। इस बार पंचक का प्रारंभ 12 जुलाई , बुधवार की सुबह प्रात: 10 बज कर 3 मिनट से हो रहा है, जो 16 जुलाई, रविवार की रात 09.13 तक रहेगा।


नक्षत्रों का प्रभाव
धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है।


शतभिषा नक्षत्र में कलह होने के योग बनते हैं।


पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र होता है।


उतराभाद्रपद में धन के रूप में दण्ड होता है।


रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना होती है।

 

पंचक में यह पांच कार्य न करें
घनिष्ठा नक्षत्र में घास लकड़ी आदि ईंधन इकट्ठा नहीं करना चाहिए इससे अग्नि का भय रहता है।


दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।


रेवती नक्षत्र में घर की छत डालना धन हानि और क्लेश करवाने वाला होता है।


चारपाई नहीं बनवाएं।


ध्यान रखें: पंचक में शव का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती हैं। यदि परिस्थितिवश किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक अवधि में हो जाती है तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखें और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करें तो परिवार में इस दोष से और किसी की मृत्यु नहीं होती एवं पंचक दोष समाप्त हो जाता है।


ज्योतिषी वरिंदर कुमार
sun.astro37@gmail.com

 


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