21 नवंबर को करें उपाय: शत्रु होंगे नत्मस्तक, मृत्युतुल्य रोग और प्रेत बाधा का होगा नाश

  • 21 नवंबर को करें उपाय: शत्रु होंगे नत्मस्तक, मृत्युतुल्य रोग और प्रेत बाधा का होगा नाश
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Saturday, November 19, 2016-3:15 PM

भैरव जी की जयंती 21 नवंबर सोमवार को है। श्रद्धालु अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इन्हें प्रसन्न करने का भरपूर प्रयास करते हैं। शास्त्रानुसार संकटों, आपदाओं और समस्त प्रकार की समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए भैरव साधना का बहुत महत्व है। अनेक तांत्रिक शास्त्रों में भैरव जी की महिमा मिलती है । भैरव शिवगण व दुर्गा के अनुचारी माने गए हैं । इनकी सवारी श्वान है । इनकी उपासना में चमेली के फूल का विशेष महत्व है। यह रात्रि में की गई आराधना से प्रसन्न होते हैं। 


इनके मंत्र जाप से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। मंत्र जाप से समस्त शत्रु नत्मस्तक होकर आपके मित्र बनते हैं । भावना से की गई भैरव साधना व मंत्र जाप जीवन में सक्सैस, संतुष्टि व शांति लाता है।


मंत्र: ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:।


संध्या के समय प्रदोष काल में घर की पश्चिम दिशा में काला आसन बिछाकर पश्चिममुखी होकर लकड़ी के पट्टे पर काला कपड़ा बिछाएं। काले कपड़े पर उड़द की ढेरी पर भैरव जी का चित्र स्थापित करें। उड़द के आटे से बने चौमुखी दीपक में सरसों के तेल डालकर दीप जलाएं । भैरव जी का धूप, दीप, पुष्प, गंध व प्रसाद से पूजन करें । प्रसाद रूप मे उड़द के मीठे पकौड़े का भोग लगाएं। पूजन पश्चात काले हकीक की माला से इस मंत्र का 4 अर्थ 7 माला का जाप करें। जाप पूरा होने के बाद उड़द के मीठे पकौड़े कुत्ते हो खिलाएं।


प्रेत बाधा से मिलेगा छुटकारा
मिट्टी के कटोरे में वर्क बिछाने के बाद उसमें उड़द दाल की वड़ी, सिंदूर, जौं, नमकीन भुजिया, शहद और सिंदूर छिड़क लें। फिर इसमें आटे से बना हुआ चोमुखी दीपक जला लें। एक केले पर 4 अगरबत्ती लगाएं, उसे मिट्टी के कुण्डे में रख लें।


फिर एक पापड़ लेकर सिंदूर और चमेली के तेल से प्रेत की आकृति बनानी हैं अब दीपक जलाएं जिस पर प्रेत बाधा का प्रभाव है उसके ऊपर से सात बार वारें और इस मंत्र का जाप करें 

 

मंत्र: हंम रक्षरक्ष हूंम फट् स्वाहा 


7 बार वार कर चौराहे पर रख आएं।

 

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

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