चाणक्य नीति: शेर की तरह पूरी शिद्दत से अपने लक्ष्य को करें पूरा

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Wednesday, November 22, 2017-4:25 PM

भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी नीतियों के बल पर एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का सम्राट बनाया जो आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुए और अखंड भारत का निर्माण किया। आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति इनकी नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। 

 

आईए जानतें है आचार्य चाणक्य की एसी ही नीति जो जीवन में हर कदम पर कामयाबी दिलाएगी-

 

जिदंगी में किसी भी क्षेत्र, कार्य में सफलता पाने के लिए ये निर्भर करता है कि हमारा प्रयास कैसा है? अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम किस प्रकार कार्य करते हैं, हमारा योगदान कितना है? अगर व्यक्ति में इन चीजों की समझ से परिश्रम करे तो सफलता पांव चूमने लगते हैं। 

 

आचार्य चाणक्य कहते हैं
प्रभूतं कायमपि वा तन्नर: कर्तुमिच्छत
सर्वारम्भेण तत्कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते।।

 

भावार्थ: यदि किसी व्यक्ति को अपना लक्ष्य प्राप्त करना है तो उसे चाहिए उसे उस कार्य में अपनी पूरी शक्ति लगाकर करना चाहिए। ठीक उसी तरह जैसे कोई शेर अपना शिकार करता है। जिस प्रकार कोई शेर अपने शिकार पर पूरी शक्ति से झपटता है और शिकार को भागने का मौका नहीं देता, इसी गुण के कारण वह कभी असफल नहीं होता है। हमें भी सिंह की भांति ही अपने लक्ष्य की ओर झपटना चाहिए और जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि कार्य में किसी प्रकार के ढीलेपन से कामयाबी आपसे दूर होने लगती है। यही सफलता प्राप्त करने का अचूक उपाय है।
 

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