घर हो या कार्यस्थल ऐसी सोच वाले लोगों से बनाएं दूरी

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Wednesday, February 15, 2017-12:20 PM

संबंध चाहे परिवार से हो या कार्यस्थल से, एक रिश्ता बन ही जाता है। उन्हीं के सहारे व्यक्ति जीवन में खुश रहता है। कुछ रिश्ते कड़वाहट भरे भी होते हैं, जिनसे जल्दी से जल्दी दूर निकल जाना चाहिए। वे जीवन में नकारात्मकता भरते हैं, पर प्यार के रिश्ते सकारात्मक होने के कारण खुशी देते हैं। भरोसे के बूते पर बने रिश्तों में कोई छिपाव या दुराव नहीं होता। ये अपनेपन से भरे होते हैं। इनके लिए खून का रिश्ता होना या एक छत के नीचे बड़ा होना जरूरी नहीं होता।

 

अक्सर कहा जाता है कि खून के रिश्तों से ज्यादा दोस्ती के रिश्ते टिकाऊ और अच्छे होते हैं। जरा सोचिए, दोस्त बेहतर कैसे होते हैं? उनमें अपेक्षाएं कम होती हैं। दूसरे, वे रिश्ते हमारे व्यवहार, मूल्य और उन तक पहुंचने के ढंग पर निर्भर करते हैं, जबकि परिवार में दोनों पक्षों की उमीदें होती हैं। कुछ अच्छा करते ही हम तत्काल प्रतिदान या प्रशंसा चाहते हैं। वे अपने हैं, इसलिए उन्हें अपने तक लाने के लिए चेष्टा नहीं करते, बल्कि अपनी उदासीनता के बावजूद उनसे उत्साह और प्रेम चाहते हैं, लेकिन दोस्त के नाराज होने पर कारण जानना चाहते हैं और मनाने की कोशिश करते हैं। 

 

हर समस्या दोस्त के साथ शेयर की जाती है, पर रिश्तेदार से उलाहना सुनना भी गवारा नहीं होता। इंसान जिस समाज और परिवेश में रहता है, वहां से सब कुछ पाना अपना हक समझता है, पर उतना ही खुलकर देना भी होता है। जो ईमानदारी चाहते हैं, उन्हें ईमानदारी देनी भी होगी। तभी रिश्ता बेहतरी की तरफ बढ़ता है। जिससे प्रेम करें, उसके पूरे प्रेम पर हमारा ही हक हो, यह सोच संतान तक के साथ रिश्ते में दूरी ला देती है।


रिश्ता सुंदर और स्थायी बनाने के लिए धैर्य, समय और ध्यान देने की जरूरत है, तभी रिश्ते हमें ताकत दे सकते हैं। जैसे सवाल का सही हल निकालने के लिए हर चरण देखभाल कर रखना पड़ता है, वैसे ही रिश्तों की नजाकत देखते हुए हमें अपने जीवन में हर कदम बढ़ाना चाहिए।


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