हर्षोल्लास से मनाई गई धनवंतरी जयंती, चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने का लिया संकल्प

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Saturday, October 29, 2016-12:00 PM

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय स्थित फार्मेसी एवं शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धनवंतरी की जयंती आयुर्वेद के विकास में जुट जाने के आवाहन के साथ मनाई गई। फार्मेसी में हवन के साथ भगवान धनवंतरी की विशेष पूजा-अर्चना की गई। 

 

अपने संदेश में गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि धनवंतरी भगवान विष्णु के तेरहवें अवतार हैं तथा दीर्घतपा के पुत्र व केतुमान के पिता हैं। वे देवताओं के वैद्य थे। उन्होंने कहा कि भगवान धनवंतरी जयंती यही प्रेरणा देती है कि परमात्मा ने सर्वश्रेष्ठ मनुष्य काया दी है, तो उसे स्वस्थ रखकर जीवन उद्देश्य की दिशा में निरंतर गतिशील रहना चाहिए। डॉ. ए.के. दत्ता, डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. गायत्री शर्मा,डॉ. मंजू चोपदार, डॉ. वन्दना श्रीवास्तव, डॉ. अलका मिश्रा आदि ने भगवान धनवंतरी से जुड़े विभिन्न पौराणिक कथानकों का जिक्र करते हुए प्रकृति के अनुसार जीवन जीने की सलाह दी। वहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर गायत्री विद्यापीठ ने एक नई पहल की। 

 

विद्यापीठ के बच्चों ने पर्यावरण बचाने की मुहिम के साथ इकोफ्रेंडली पर्व मनाने, पटाखे नहीं फोड़ने तथा चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने के संकल्प के साथ तथा श्री श्याम बिहारी दुबे के नेतृत्व में शांतिकुंज के युग शिल्पी प्रशिक्षणार्थियों ने भी जनजागरण रैली निकाली। इससे पूर्व शांतिकुंज आने वाले श्रद्धालुओं को पारिवारिक स्नेह की अनुभूति कराने वाली श्रद्धेया शैल जीजी एवं श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने अखिल विश्व गायत्री परिजनों से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार करने एवं इकोफ्रेण्डली दीपावली मनाने का आवाहन किया। दीपावली की पूर्व वेला में विद्यार्थियों ने जन जागरण रैली निकाली। गायत्री विद्यापीठ से प्रारंभ होकर रैली हरिपुर कलां, सप्तसरोवर क्षेत्र होते हुए शांतिकुंज पहुंची। शिक्षकों ने स्वयं व अपने निकटवर्ती परिवारों को भी पर्यावरण संरक्षण के तहत फटाखे नहीं चलाने एवं चीनी वस्तुओं के विरोध करने की बात कही।

 

डॉ. पण्ड्या का जन्मदिन सादगी से मनाया जाएगा देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या का 67 वां जन्मदिन 29 अक्टूबर रूप चतुर्दशी को 'चेतना दिवस' के रूप में सादगी पूर्ण ढंग से मनाया जाएगा। एम.डी. (मेडीसिन) में स्वर्ण पदक प्राप्त गायत्री परिवार प्रमुख डॉ पण्ड्या ने प्रारंभ के 24 वर्ष अपने शिक्षण कार्य में बिताने के बाद शेष जीवन अपने सद्गुरु युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य श्री को सौंप दिया। उन्होंने कठपुतली की भांति अपने आपको गुरु के बताए निर्देशों के पालन करते हुए देसंविवि एवं गायत्री परिवार को नई ऊंचाइयों में पहुंचाया है।


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