कल काली गाय को खिलाई गई ये चीज करेगी हर बाधा से मुक्त

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Wednesday, December 13, 2017-10:44 AM

कल गुरुवार दि॰ 14.12.17 पौष कृष्ण द्वादशी पर कामधेनु रूप में गौ पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। शास्त्रों में कामधेनु सबका पालन करने वाली कही गयी है। जैसे देवों में विष्णु, सरोवरों में समुद्र, नदियों में गंगा, पर्वतों में हिमालय, भक्तों में नारद, पुरियों में कैलाश, क्षेत्रों में केदार श्रेष्ठ है, वैसे ही गायों में कामधेनु सर्वश्रेष्ठ है। कामधेनु की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। मन्थन से देवकार्यों की सिद्धि हेतु साक्षात् सुरभि कामधेनु प्रकट हुईं। शब्द "काम" का अर्थ है कामना यानि इच्छा और धेनु का अर्थ है पूर्ण करना अत: कामधेनु का अर्थ है इच्छा को पूर्ण करने वाली। शास्त्रों में इसे सुरभि भी कहा जाता है। गौ का दूध अमृत तुल्य होता है। कामधेनु में दैवीय शक्तियों से पूर्ण गाय में सभी देवी- देवताओ का वास रहता है। शास्त्रों में कामधेनु से संबंधित कई कथाएं हैं। परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि के पास कामधेनु गाय थी। राजा सहस्त्रार्जुन इसी गाय को लेने के लिए आश्रम पर हमला कर दिया पर गाय स्वर्ग की तरफ चली गयी। तब परशुराम ने  सहस्त्रार्जुन का वध किया। शास्त्रनुसार कामधेनु रूप में गौ पूजन से सर्व पापों से मुक्ति मिलती है, सभी इच्छाएं पूरी होती हैं, सर्व बाधा का निवारण होता है।

 
विशेष पूजन विधि: मध्यान के समय उत्तरमुखी होकर विधिवत गौ पूजन करें। गौघृत में हल्दी मिलाकर दीप करें, सुगंधित धूप करें। केसर से तिलक करें। गैंदा के फूल चढ़ाएं, बेसन से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें।


पूजन मुहूर्त: दिन 12:31 से दिन 13:31 तक है। 


पूजन मंत्र: ॐ सर्वदेवमये देवि लोकानां शुभनन्दिनि। मातृ-ममा-भिषितं सफलं कुरु नन्दिनि॥


उपाय
पाप मुक्ति हेतु गाय को उड़द की कचौड़ी खिलाएं।   


सर्व इच्छाओं की पूर्ति हेतु पीली गाय को नवधान खिलाएं।


सर्व बाधाओं के निवारण हेतु काली गाय को गुड़ खिलाएं।

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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