हनुमान जयंती कल: इस विधि से करें पूजन, संकटमोचन लगाएंगे बेड़ापार

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Monday, April 10, 2017-8:24 AM

विश्व में श्रद्धा, भक्ति और शक्ति के प्रतीक अंजनी पुत्र वीर हनुमान कलियुग के अधिष्ठाता देव हैं। शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के जन्म से पहले भगवान शिव का 11वां अवतार रुद्र रूप में हुआ, जो हनुमान जी के नाम से प्रसिद्ध हुए। वह अपनी निष्काम सेवा और प्रभु भक्ति के बल पर भारतीय संस्कृति में पूज्य माने जाते हैं। भगवान श्री राम के परम सेवक श्री हनुमान जी के बारे में  प्रसिद्ध है कि ‘दुनिया चले न श्री राम के बिना, राम जी चलें न हनुमान के बिना’।


कैसे करें पूजन  
प्रात: स्नान आदि क्रियाओं से निवृत्त होकर हनुमान जी की पूजा एवं आराधना करें। ‘श्री हनुमान यंत्र’ को शुभ मुहूर्त में चौकी पर लाल वस्त्र बिछा कर स्थापित करें। ‘राम-राम ऐं हमीं हनुमते, रामदूताय नम: राम राम’ मंत्र से 11 माला का जाप करें। किसी विशेष कामना की पूर्ति के लिए 45 दिन तक ब्रह्मचर्य एवं संयम से श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। 


इसके अतिरिक्त श्री सुंदरकांड, संकटमोचन हनुमानाष्टक, विष्णु सहस्त्रनाम, बजरंग-बाण, पंचमुखीहनुमंत कवच, एकादश मुख हनुमंत कवच, लांगूलास्त्रशत्रुगाय हनुमत स्तोत्रम्,श्री हनुमत गायत्री मंत्र, हनुमान जी के महामंत्र का पाठ करें। व्रत करने वाले मनुष्य सारा दिन उपवास रखें, तांबे के रंग की वस्तुओं का भोग लगाएं। हनुमान जी की प्रतिमा पर चमेली के तेल में सिंदूर मल कर लगाने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। 
हनुमान जी के चरणों से सिन्दूर ले कर उसका टीका माथे पर लगाएं। हर मंगलवार भी ऐसा करें, अशुभता आपसे कोसों दूर रहेगी।


वीना जोशी
veenajoshi23@gmail.com 


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