किसी व्यक्ति के मुखौटे से पर्दा उठाना हो तो आजमाएं ये तरकीब, चुटकियों में मिलेगा हल

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Monday, April 17, 2017-12:36 PM

बात द्वापरयुग की है। अज्ञातवास में पांडव रूप बदल कर ब्राह्मणों के वेश में रह रहे थे। एक दिन उन्हें कुछ ब्राह्मण मिले। वे राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी के स्वयंवर में जा रहे थे। पांडव भी उनके साथ चल दिए। स्वयंवर में पानी में देखकर ऊपर घूम रही मछली पर निशाना लगाना था। वहां मौजूद सभी ने प्रयास किया लेकिन निशाना सिर्फ अर्जुन ही लगा पाए। शर्त के अनुसार द्रौपदी का स्वयंवर और इसके बाद शादी अर्जुन के साथ हुई। इसके बाद पांडव द्रौपदी को लेकर अपनी कुटिया में ले आए।


एक ब्राह्मण द्वारा स्वयंवर में विजयी होने पर राजा द्रुपद को बड़ी हैरानी हुई। वह अपनी पुत्री का विवाह अर्जुन जैसे वीर युवक के साथ करना चाहते थे। अत: राजा द्रुपद ने ब्राह्मणों की वास्तविकता का पता लगाने के लिए राजमहल में भोज का कार्यक्रम रखा और उन ब्राह्मणों को भी बुलाया। राजमहल को कई वस्तुओं से सजाया गया। एक कक्ष में फल-फूल, तो दूसरे कक्ष को अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित किया गया। भोजन करने के बाद सभी अपनी मनपसंद चीजें देखने लगे लेकिन ब्राह्मण वेशधारी अस्त्र-शस्त्र वाले कमरे में पहुंचे। यह सब कुछ राजा द्रुपद देख रहे थे। वह समझ गए यह ब्राह्मण नहीं, बल्कि क्षत्रिय हैं।


मौका मिलते ही उन्होंने ब्राह्मण वेशधारी युधिष्ठिर से पूछा। सच बताइए, आप ब्राह्मण हैं या क्षत्रिय? युधिष्ठिर हमेशा सच बोलते थे। उन्होंने स्वीकार कर लिया कि वे सचमुच क्षत्रिय हैं और स्वयंवर जीतने वाले अर्जुन हैं। यह जानकर राजा द्रुपद बहुत प्रसन्न हुए।


शिक्षा : व्यक्ति अपने वेश भले ही बदल ले लेकिन उसके विचार आसानी से नहीं बदलते हैं। हम जीवन में जैसे काम करते हैं वैसे ही हमारे विचार होते हैं।

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