ऐसी आदत को खुद में न होने दें हावी, कोसों दूर भागेगी सफलता

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Tuesday, July 11, 2017-11:23 AM

एक बार एक समुद्र विज्ञानी ने एक प्रयोग किया। उसने एक शार्क मछली को पानी के एक बड़े-से टैंक में डाला और साथ ही उसमें कुछ छोटी मछलियां भी डाल दीं।
जैसी कि उम्मीद थी, शार्क ने जल्द ही झपट्टा मार कर उन तमाम मछलियों का सफाया कर दिया। इसके बाद उस समुद्र विज्ञानी ने टैंक के बीचों-बीच कांच की एक मजबूत दीवार लगाई और उसके एक हिस्से में शार्क को डाला तथा दूसरे हिस्से में पहले की तरह छोटी मछलियों को छोड़ दिया। जैसे ही शार्क की नजर उन मछलियों पर पड़ी, वह उम्मीद के मुताबिक तुरंत उनकी ओर लपकी, पर इस बार वह कांच की मजबूत दीवार से टकराई और वहीं थम गई। किंतु शार्क ने हार नहीं मानी। वह थोड़ी-थोड़ी देर में तैरते हुए पलटकर उन मछलियों की तरफ आती, मगर हर बार कांच की दीवार उसका रास्ता रोक लेती।

दूसरी ओर मछलियां आराम से पानी में तैर रही थीं। आखिरकार एक-डेढ़ घंटे की कोशिश के बाद शार्क ने हार मान ली। दो-तीन रोज के बाद समुद्र विज्ञानी ने कांच की मजबूत दीवार को हटाकर उस जगह पर अपेक्षाकृत पतले कांच की पट्टी लगा दी। शार्क अब भी कभी-कभार इन मछलियों की ओर आने की कोशिश करती, हालांकि उसकी रफ्तार सुस्त और हमले कमजोर होते तथा वह कांच की पट्टी को पार नहीं कर पाती।

धीरे-धीरे शार्क के हमले कम होते गए। अब वह ज्यादा जोर भी नहीं लगाती थी। कुछ दिनों बाद समुद्र विज्ञानी ने वहां से कांच की दीवार हटाकर पतली-सी पारदर्शी पन्नी का एक पार्टीशन लगा दिया, मगर शार्क ने तो मानो इस ओर ध्यान देना ही छोड़ दिया था।
उसने इसे भी पार करने की कोशिश नहीं की। कुछ दिनों बाद यह पर्दा भी हटा दिया गया, मगर शार्क अब पहले की तरह टैंक के आधे हिस्से में ही तैरती रहती और इन मछलियों की ओर नहीं आती।

दरअसल शार्क मान चुकी थी कि वह इन मछलियों तक नहीं पहुंच सकती, लिहाजा उसने कोशिश करना भी छोड़ दिया। इसी तरह जो इंसान मुश्किलों से हारकर बैठ जाते हैं, उनसे सफलता दूर ही रहती है। हम परिस्थितियों का सही तरीके से आकलन कर आगे बढ़ें तो हमें कामयाबी जरूर मिलेगी।

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