जीवन को तहस-नहस कर सकती है ये लापरवाही, रखें ध्यान

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Monday, April 10, 2017-12:47 PM

सूर्यवेधी मकान पूर्व से पश्चिम की ओर लम्बा होता है और उत्तर से दक्षिण की ओर चौड़ा कम होता है। यह भवन सूर्य से संबद्ध होता है। अगर राजा रामचंद्र को देखें तो उनका जन्म दोपहर में ठीक बारह बजे हुआ था और वह नियम का बड़ा पालन करने वाले तथा मर्यादा पुरुषोत्तम थे। उसी प्रकार सुबह के सूरज से कुछ ही मिनट में और काफी कम समय में आपको विटामिन ‘डी’ की प्राप्ति सहज ही हो जाती है परन्तु मध्य काल में सिर के ठीक ऊपर सूर्य हों तो आप ज्यादा समय धूप को बर्दाश्त नहीं कर पाते और ज्यादा चल भी नहीं पाएंगे। कुछ लोग तो चक्कर खाकर गिर पड़ते हैं।


कहने का तात्पर्य है कि सूरज सुबह का ही ठीक होता है। वह भी कुछ मिनट के लिए उसके बाद उसमें से अल्ट्रा वाइलेट किरणें निकलती हैं जो शरीर व त्वचा के लिए काफी हानिकारक हैं। उसी प्रकार से अगर आपका मकान सूर्यवेधी है तो निश्चित आप यह जान लें कि आपको नियम से चलना होगा। जरा-सी आपकी लापरवाही जीवन को तहस-नहस कर सकती है।


इस भवन में ज्यादातर परेशानी आने की संभावना बनी रहती है। जीवन में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। जीवन अस्थिर जैसा लगने लगता है परन्तु पूर्व व उत्तर दिशा खुली ज्यादा हो वहां पर खिड़कियां ज्यादा हों तो जीवन कुछ हद तक संभल जाता है परन्तु मानसिक शांति मिलना कठिन होता है लेकिन इसमें परेशानियां आएंगी और उससे आप बाहर भी आते जाएंगे। अगर पूर्व और उत्तर खुला हो तो काफी संघर्ष करना पड़ता है। उस संघर्ष का परिणाम उतना नहीं आ पाता जितना आप चाहते हैं और इस मकान में गर्मी, गुस्सा और भय-परेशानी ये विरासत में प्राप्त हो जाते हैं इसलिए अगर आप वास्तु चयन कर रहे हैं तो इस पर आपको अवश्य ही चिंतन करना होगा। अन्यथा थोड़ी-सी चूक आपका पूरा जीवन बदल कर अवश्य ही रख देगी इसलिए सूर्यवेधी मकान बहुत ही सोच-समझ कर वास्तु के सिद्धांत को बिना जाने लेना अपने आप में मूर्खता होगी।

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