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कामिका एकादशी: इस विधि से करें व्रत-पूजन और पारण, मिलेगा वाजपेय यज्ञ का पुण्य

  • कामिका एकादशी: इस विधि से करें व्रत-पूजन और पारण, मिलेगा वाजपेय यज्ञ का पुण्य
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Tuesday, July 18, 2017-12:09 PM

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी व्रत सभी पातकों को हरने वाली तथा सभी सुखों को देने वाली है। मनुष्य की सभी कामनाओं की पूर्ति करने के कारण ही इसका नाम कामिका है, इस बार यह व्रत 20 जुलाई को है। इस व्रत के प्रभाव से जीव के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा संसार के सभी सुखों को भोगता हुआ मनुष्य अंत में प्रभु के परमधाम को प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास को पुण्य कर्मों की कमाई करने वाला मास कहा गया है इसलिए इसकी महिमा अत्याधिक है तथा एकादशी का नाम स्मरण करने से ही मनुष्य को वाजपेय यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है।


कैसे करें व्रत एवं पूजन-
प्रत्येक एकादशी व्रत की भांति इस एकादशी का व्रत करने का पूर्व संकल्प करके ही व्रत किया जाता है तथा द्वादशी को सूर्य भगवान को जल चढ़ाकर तथा ब्राह्मणों को दान आदि देकर ही व्रत का पारण करना चाहिए। इस दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर अपनी स्नानादि क्रियाओं से निवृत होकर भगवान का विधिवत धूप, दीप, नेवैद्य, फल, तुलसी और पुष्पादि से पूजन करें। इस दिन भगवान श्रीधर का पूजन हरि, विष्णु, माधव, केशव और मधुसूदन रूप में किया जाता है। यह व्रत बृहस्पतिवार को है इसलिए भगवान का पीले रंग के पुष्पों से पूजन करना चाहिए तथा पीले रंग के फल ही प्रसाद रुप में भोग लगाने चाहिए। भगवान को पीत वस्त्र बहुत पसंद हैं इसलिए पीले रंग की वस्तुओं का ही दान करना चाहिए।


क्या कहते हैं विद्वान-

अमित चड्डा जी के अनुसार एकादशी को मंदिर में दीपदान करने, रात्रि जागरण करने और तुलसी पूजन की सर्वाधिक महिमा है। इस दिन सभी पाप अन्न का आश्रय लेते हैं इसीलिए व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार इस दिन मां यशोदा तथा नंद बाबा के साथ ही भगवान के सभी परिकर वाले भी उपवास करते हुए केवल
फलाहार ही करते हैं।  उन्होंने बताया कि व्रतोत्सव निर्णय- पत्रम के अनुसार व्रत का पारण 21 जुलाई को प्रात: 9.31 से पहले किया जाना चाहिए।

वीना जोशी
veenajoshi23@gmail.com

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