इस टनल में अमेरिकी सैनिक तक घुसने से डरते थे, जानिए क्यों?

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Saturday, July 22, 2017-4:07 PM

वियतनाम युद्ध (सन् 1954 से 1975) अपने समय के बड़े युद्धों में से एक था जिसे छोटे विश्व युद्ध की संज्ञा भी दी जाती है। इस युद्ध में लाखों सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस युद्ध के दौरान ‘कू ची’ टनल का जिक्र मिलता है। कहते हैं कि यह एक ऐसी टनल थी, जिसमें अमेरिकी सैनिक तक घुसने से डरते थे। तो आइये जानते हैं इस रहस्यमयी टनल से जुड़े रहस्य ‘विएतनाम’ की सेना जंगल की लड़ाई में बहुत ही माहिर थी। वह कब जंगल में किसी को मारकर गायब हो जाते थे, किसी को पता भी नहीं चलता था कि घने जंगलों में कहां-कहां पर इसके सिपाही छिपे हैं। असल में उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए एक टनल बना डाली थी। जिसमें घुसने का हुनर उनको ही आता था। वह अमेरिकी सैनिकों को मारकर इसी टनल में घुस जाते थे। जब अमेरिकी उन्हें पकड़ने की कोशिश में इस टनल के अंदर जाते थे, तो इसके मुहाने पर लगे नुकीले तार में फंसकर मर जाते थे। धीरे-धीरे अमेरिका के कई सारे सैनिक मारे जा चुके थे। उनके सामने यह एक बड़ी समस्या थी। किसी को समझ नहीं आ रहा थी कि आखिर इस टनल की गुत्थी को कैसे सुलझाया जाए।


योजना के तहत अमेरिकी सैनिक विएतनाम के सैनिकों के पीछे-पीछे गए और इस बार वह टनल में घुसने में कामयाब रहे। टनल के अंदर जाते ही जैसे ही उन्होंने इसकी संरचना को देखा तो वह भौंचक्के रह गये। एक छोटी सी दिखने वाली टनल किसी बड़े जिले से कम नहीं थी। यह टनल वियतनाम के ‘कू ची’ जिले में थी, इसलिए इसे ‘कू ची’ टनल का नाम दिया गया। जंग के खत्म होने के बाद टनल के रहस्य को पूरी तरह से जाना गया। कहते हैं कि यह पूरी टनल हाथों से खोदी गई थी। इस टनल के जाल को 250 किलोमीटर लम्बा बताया जाता है।


युद्ध समाप्त होने के बाद ‘कू ची’ टनल की रहस्यमयी प्रसिद्धि के कारण विश्वभर के हजारों पर्यटक रोजाना इसे देखने आते हैं। टनल का छोटा सा हिस्सा ही पर्यटकों को देखने के लिए खोला गया है। इस भाग को देखने से ही समझ आ जाता है कि टनल ने किस प्रकार से अमेरिका की नाक में दम कर दिया था। पर्यटकों के देखने के लिए जिस हिस्से को खोला गया है उसकी उत्तर दिशा में लगभग 200 मीटर की दूरी पर ‘‘सैगोन’’ नदी बह रही है। इस टनल को देखने पर्यटक 46 किलोमीटर दूर वियतनाम के सबसे बड़े शहर ‘‘हो ची मिन्ह सिटी’’ से बस के अलावा स्टीमर और बोट से भी आते हैं।


सैगोन नदी ‘कू ची’ टनल काम्प्लेक्स की पश्चिम से उत्तर दिशा में बहती हुई पूर्व दिशा की ओर आगे बढ़ गई है। काम्प्लेक्स के नैऋत्य कोण में तालाब है। नदी की भौगोलिक स्थिति के कारण काम्प्लेक्स का ईशान कोण कट रहा है और पश्चिम दिशा में नदी और नैऋत्य कोण में तालाब है। वास्तुशास्त्र के अनुसार जहां ईशान कोण के साथ पश्चिम दिशा और नैऋत्य कोण के वास्तुदोष होते हैं वहां अकाल मृत्यु या हत्याएं होती हैं। इसी कारण यहां युद्ध के दौरान हजारों अमेरिकी और वियतनाम के सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा की नीचाई और पानी का जमाव प्रसिद्धि का कारण बनता है इसलिए यह ‘कू ची’ टनल युद्ध के दौरान ही चर्चित हो गई थी और युद्ध की समाप्ति के बाद भी प्रसिद्ध है और रहेगी।


वास्तुगुरू कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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