मां लक्ष्मी को एक गलती की भगवान विष्णु ने दी एेसी सजा

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Sunday, November 26, 2017-4:45 PM

एक बार भगवान विष्णु के मन में धरती पर घूमने का विचार आया और वह अपनी यात्रा की तैयारी में लग गए। स्वामी को देख कर मां लक्ष्मी ने पूछा, आप कहां जा रहे हैं तो विष्णु जी ने कहा लक्ष्मी मैं धरती लोक पर घूमने जा रहा हूं तो लक्ष्मी मां ने कहा, हे देव क्या मैं भी आप के साथ चल सकती हूं। भगवान विष्णु ने कहा एक शर्त पर तुम मेरे साथ चल सकती हो तुम धरती पर पहुंच कर उत्तर दिशा की ओर बिल्कुल नहीं देखोगी माता लक्ष्मी मां मान गई।

 

मां लक्ष्मी ओर भगवान विष्णु धरती पर पहुच गए, अभी सूर्य देवता निकल रहे थे, रात बरसात हो कर हटी थी, चारों ओर हरियाली ही हरियाली थी, उस समय चारो ओर बहुत शांति थी। धरती बहुत ही सुंदर दिख रही थी। मां लक्ष्मी मंत्र मुग्ध हो कर धरती को देख रही थी। वह भुल गईं कि पति को क्या वचन दे कर आई है, और चारों ओर देखती हुई कब उत्तर दिशा की ओर देखने लगी पता ही नही चला।


उत्तर दिशा में मां लक्ष्मी को एक बहुत ही सुंदर बगीचा नजर आया। उस तरफ से भीनी-भीनी खुशबु आ रही थी। बहुत ही सुंदर-सुंदर फूल खिले थे, यह एक फूलों का खेत था। मां लक्ष्मी बिना सोचे समझे उस खेत मे गई ओर एक सुंदर सा फूल तोड लाई। जब मां लक्ष्मी वापिस आईं तो भगवान विष्णु की आंखो मै आंसु थे, ओर भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को कहा कि कभी भी किसी से बिना पुछे उस का कुछ भी नही लेना चाहिए। साथ ही अपना वचन भी याद दिलाया।


मां लक्ष्मी को अपनी भूल का पता चला तो उन्होंने भगवान विष्णु से इस भूल की माफी मांगी तो भगवान ने कहा कि जो तुम ने जो भूल की है उस की सजा तो तुम्हें जरुर मिलेगी। जिस माली के खेत से तुमने बिना पुछे फूल तोड़ा है, यह एक प्रकार की चोरी है इस लिए अब तुम तीन साल तक माली के घर नौकर बन कर रहोगी। उस के बाद मैं तुम्हें वैकुण्ठ मे वपिस बुलाऊंगा, मां लक्ष्मी ने चुपचाप सर झुका कर हां कर दी।


मां लक्ष्मी एक गरीब औरत का रुप धारण करके उस खेत के मालिक के झोपड़े में गई। उसके मालिक नाम माधव था, माधव की बीवी दो बेटे और तीन बेटियां थी। सभी उस छोटे से खेत में काम करके किसी तरह से गुजारा करते थे। 

 

मां लक्ष्मी जब एक साधारण ओर गरीब औरत बन कर जब माधव के झोपड़े पर गई तो माधव ने पूछा बहन तुम कौन हो और इस समय तुम्हें क्या चाहिए तब मां लक्ष्मी ने कहा, मैं एक गरीब औरत हू मेरी देख भाल करने वाला कोई नहीं है मैंने कई दिनों से खाना भी नहीं खाया मुझे कोई भी काम देदो, साथ में मैं तुम्हारे घर का काम भी कर दिया करुंगी। बस मुझे अपने घर में एक कोने में आसरा देदो। माधव बहुत ही अच्छे दिल का मालिक था। उसे दया आ गई लेकिन उस ने कहा,बहन मैं तो बहुत ही गरीब हुूं, मेरी कमाई से मेरे घर का खर्च मुश्किल से चलता है, लेकिन अगर मेरी तीन की जगह चार बेटियां होती तो भी मैंने गुजारा करना था, अगर तुम मेरी बेटी बन कर जैसा रूखा सूखा हम खाते हैं उस में खुश रह सकती हो तो बेटी अंदर आ जाओ।


माधव ने मां लक्ष्मी को अपने झोपड़े में शरण दे दी। मां लक्ष्मी तीन साल उस माधव के घर पर नौकरानी बन कर रही। जिस दिन मां लक्ष्मी माधव के घर आई थी उस से दूसरे दिन ही माधव को फूलो से  इतनी आमदनी कि उसने शाम को एक गाय खरीद ली। धीरे-धीरे माधव बहुत अनीर होने लगा। उसने काफी जमीन खारीद ली और एक बहुत बड़ा मकान बनावा लिया।


माधव हमेशा सोचता था कि मुझे यह सब इस महिला के आने के बाद मिला है। इस बेटी के आने से मेरी किस्मत चमक गई। वहीं मां लक्ष्मी अभी भी घर में और खेत में काम करती थी। एक दिन माधव जब अपने खेतों से काम खत्म करके घर आया तो उस ने अपने घर के सामने दीवार पर एक देवी स्वरुप गहनो से लदी एक औरत को देखा। ध्यान से देख कर पहचान गया अरे यह तो मेरी मुहं बोली चऔथी बेटी यानि वही औरत है। तब उशे ज्ञात हुआ कि यह तो मां लक्ष्मी है। 

 

अब तक माधव का पूरा परिवार बाहर आ गया था। सब हैरान हो कर मां लक्ष्मी को देख रहे थे। माधव बोला है मां हमे माफ करें हम नेअंजाने में आप से अपने घर और खेत में काम करवाया। अब मां लक्ष्मी मुस्कुराई और बोलीं, "माधव तुम बहुत ही अच्छे और दयालु व्यक्ति हो। तुम ने मुझे अपनी बेटी की तरह रखा। इस के बदले मैं तुम्हें वरदान देती हुं कि तुम्हारे पास कभी भी खुशियों और धन की कमी नही रहेगी, तुम्हें सारे सुख मिलेंगे जिस के तुम हक दार हो, ओर फिर मां अपने स्वामी के द्वारा भेजे रथ मे बैठ कर वैकुण्ठ चली गई।

 

इस कहानी मै मां लक्ष्मी का संदेशा है कि जो लोग दयालु और साफ दिल के होते हैं मैं वही निवास करती हुं। हमे सभी मानवओं की मदद करनी चाहिए। कोई जितना भी गरीब क्यों न उसे तुच्छ नही समझना चाहिए।

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