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वैष्णव विधान: जानें, 14 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत रखना क्यों है उत्तम

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Wednesday, February 14, 2018-8:25 AM

महाशिवरात्रि पर्व एक ऐसा पावन धार्मिक पर्व है जिसकी प्रतीक्षा प्रत्येक शिवभक्त को रहती है। भगवान शिव का अर्थ है- कल्याण। यह रात्रि बड़ी कल्याणकारी है। शिव मंगल के प्रतीक हैं। शिव संस्कृति हैं। शिव शाश्वत हैं, शिव सनातन हैं। शिव साकार हैं, शिव निराकार हैं, शिव ब्रह्म हैं, शिव सृष्टि हैं। शिव प्रकृति के सर्जक हैं। शिव अनादि हैं। शिव जीवन हैं। शिव मोक्ष हैं। समस्त शास्त्रों के मतानुसार शिवरात्रि व्रत सबसे उत्तम है। शास्त्रों में इस व्रत को 'व्रतराज' कहा जाता है जो चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। आप में क्षमता हो तो अपने पूरे जीवन काल तक इस व्रत को करें अन्यथा 14 वर्ष के उपरांत संपूर्ण विधि-विधान से इसका उद्यापन कर दें।


आज भी मनाई जा रही है महाशिवरात्रि विशेषकर उत्तर-पूर्वी भारत में, भोले के भक्त उन्हें प्रसन्न करने में जुटे हैं। माना जाता है की एकमात्र महाशिवरात्रि के दिन व्रत-उपवास व पूजा-अनुष्ठान करने से संपूर्ण वर्ष का पुण्य एकसाथ अर्जित किया जा सकता है।  


श्री चैतन्य गौड़िया मठ से श्री भक्ति विचार विष्णु जी महाराज ने पंजाब केसरी को जानकारी देते हुए बताया की वैष्णव विधान में दिन का आरंभ सूर्योदय से माना जाता है। इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी 2018 को रात्रि 11:34 को प्रारम्भ हो रही है जो की त्रयोदशी तिथि से युक्त है तथा 14 फरवरी को रात्रि 12:46 तक है। 13 फरवरी को त्रयोदशी तिथि एवं प्रदोष व्रत से युक्त है। अतः यह व्रत प्रदोष व्रत में मान्य होगा न कि शिवरात्रि में मान्य होगा, क्योंकि इस दिन निशा काल तक त्रयोदशी तिथि है। 14 फरवरी को चतुर्दशी उदया तिथि से प्रारंभ हो कर रात्रि कालीन 12:46 तक है, इस दिन प्रदोष बेला में चतुर्दशी तिथि प्राप्त हो रही है। जिस समय से निशा पूजन का विधान प्रारंभ होता है। इस दिन महाशिवरात्रि का व्रत एवं पूजन करना हितकर है। चतुर्दशी के उपलक्ष्य में शिवालयों व मंदिरों में विशेष पूजा अभिषेक व अर्चन किया जाएगा।


पारण समय- 15 फरवरी सुबह 10 बजे।

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