मुहूर्त निकलवाए बिना न करें विवाह, भोगने पड़ेंगे अशुभ प्रभाव

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Thursday, November 03, 2016-2:09 PM

शादी आदमी व औरत के बीच का वो रिश्ता हैं जहां ये एक दूसरे से आत्मिक, मानसिक और शारीरिक रूप से जुड़कर एक नए संसार का निर्माण करते हैं। भगवान शंकर व देवी पार्वती को अर्धनारीश्वर की संज्ञा शादी का ही प्रमाण है।


शास्त्रों में वर्णित चार पुरुषार्थों में से एक "काम" नाम का पुरुषार्थ शादी के बाद ही पूरा होता है। वैसे तो औलाद को बिना शादी किए भी पैदा किया जा सकता है, पर संसारिक मर्यादा का हनन न हो, आने वाली संतान को इस बात का भान हो कि वह अमुक समाज की वंंश प्रणाली का हिस्सा है, अपने समाज व कुल को आगे बढ़ाने के लिए पैदा होने वाला जातक चिंतित हो सके, अपने का पोषण कर उच्च से उच्च स्थान देने की हिम्मत माता-पिता के अन्दर चल सके आदि कारणो के लिए शादी की जाती है।


ज्योतिषशास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति नव ग्रहों से पूर्ण है। शास्त्रनुसार विभिन्न ग्रहों को ज्योतिष वैवाहिक रूप में संज्ञा दी गई है मंगल से कामुकता व गुरु से पति देखा जाता है। शुक्र से पत्नी व राहू से अनैतिक संबंध व ससुराल देखा जाता है। इसी क्रम में नवग्रहों के अनुरूप विवाह मुहूर्त बनाए गए हैं। 


जब वर-वधू के आपसी संबंधों का ग्रह मिलान किया जाता है तथा दोनों के ग्रहों को राशि स्वामियों के अनुसार समय तय किया जाता है तभी विवाह किया जाता है, व उसी ग्रह के नक्षत्र के समय में लग्न व समय निकाल कर विवाह किया जाता है, इस प्रकार से उन ग्रहों की शक्तियो का आशीर्वाद मिलने पर शादी सुचारु रूप से चलती है, अगर बिना मुहूर्त के शादी की जाए तो कुछ समय में शारीरिक संतुष्टि पश्चात विवाह विच्छेद हो जाता है। 


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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