Subscribe Now!

प्रकृति हमें कई महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाती है

  • प्रकृति हमें कई महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाती है
You Are HereDharm
Monday, February 12, 2018-2:05 PM

प्रकृति और मनुष्य के बीच बहुत गहरा संबंध है। मनुष्य के लिए धरती उसके घर का आंगन, आसमान छत, सूर्य-चांद-तारे  दीपक, सागर-नदी पानी के मटके और पेड़-पौधे आहार के साधन हैं। इतना ही नहीं, मनुष्य के लिए प्रकृति से अच्छा गुरु कोई नहीं हैं। न्यूटन जैसे महान विज्ञानियों को गुरुत्वाकर्षण समेत कई पाठ प्रकृति ने सिखाएं हैं। कवियों ने प्रकृति के सान्निध्य मेें रहकर एक से बढ़कर एक कविताएं लिखीं। इसी वजह से आम आदमी ने प्रकृति के तमाम गुणों को समझकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव किए। दरअसल प्रकृति हमें कई महतिवपूर्ण पाठ पढ़ाती है। जैसे पतछड़ का मतलब पेड़ का अंत नहीं है। इस पाठ को जिसने भी अपने जीवन में आत्मसात किया, उसे नाकामी से कभी डर नहीं लगा। एेसे व्यक्ति असफलता पर विचलित हुए बगैर नए सिरे सफलता पाने की कोशिश करते हैं और आखिरकार सफल होते हैं। इसी तरह फलों से लदे, मगर नीचे की ओर झुके पेड़ हमें सफलता और प्रसिद्धि मिलने या संपन्न होने के बावजूद विनम्र और शालीन बने रहना सिखाते हैं।

 

उपन्यासका प्रेमचंद के मुताबिक साहित्य में आर्दशवाद का वही स्थान हैं, जो जीवन में प्रकृति का है। प्रकृित में हर किसी का अपना महत्व है। एक छोटा-सा कीड़ा भी प्रकृति के लिए उपयोगी है। मत्स्यपुराण में एक वृक्ष को सौ पुत्रों के समान बताया बताया गया। इसी कारण हमारे यहां वृक्ष पूजने की सनातन परंपरा रही है। पुराणों में कहा गया है कि जो व्यक्ति नए वृक्ष लगता है, वह स्वर्ग में उतने ही वर्षों तक फलता-फूलता है, जितने वर्षों तक उसके लगाए वृक्ष फलते-फूलते हैं। प्रकृति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह अपनी चीजों का उपभोग खुद नहीं करती। जैसे नदी अपना जल स्वयं नहीं पीती, पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते, फूल देते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि प्रकृति किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं करती लेकिन मनुष्य जब प्रकृति से अनावश्यक खिलवाड़ करता है, तब उसे गुस्सा आता ह, जिसे वह समय-समय पर सूखा, बाढ़, तूफान के रूप में व्यक्त करते हुए मनुष्य को सचेत करती है।

अपना सही जीवनसंगी चुनिए| केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन

Recommended For You