मनुष्य बुद्धि का प्रयोग कर जीवन को बना सकता है कामयाब

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Sunday, January 14, 2018-11:18 AM

एक शिष्य ने गुरु से पूछा, ‘‘गुरु जी, सभी प्राणी जन्म लेते हैं और मरते हैं। इस जगत के सभी प्राणी चाहे वे जीव-जंतु हों अथवा मनुष्य, सभी में भूख, पीड़ा, हर्ष आदि के भाव प्रकट करने की क्षमता है। सभी अपना बचाव करना भी जानते हैं। सभी को बीमारी आदि से भी जूझना पड़ता है। पशु-पक्षी, जीव-जंतु, मनुष्य सभी का अंत निश्चित है लेकिन क्या कारण है कि केवल मनुष्यों में ही साधु, तपस्वी, ज्ञानी, चोर, डाकू, लुटेरे, आतंकवादी, वहशी दरिंदे आदि होते हैं? मनुष्यों में ही भांति-भांति की जातियां और धर्म क्यों होते हैं?’’

 

शिष्य का प्रश्न सुनकर गुरु जी मुस्कुरा कर बोले, ‘‘तुमने बहुत ही अच्छा प्रश्र पूछा वत्स। दरअसल इसके पीछे प्रमुख कारण है व्यक्ति के अंदर बुद्धि का होना। बुद्धि के कारण ही मनुष्य वे भी हो सकते हैं जो पशु-पक्षी, जीव-जंतु आदि नहीं हो सकते। वे पंडित, ज्ञानी, तपस्वी, चोर, लुटेरे और आतंकवादी भी हो सकते हैं किंतु मनुष्य अपनी बुद्धि का सार्थक प्रयोग करने की बजाय भटक जाता है और गलत कार्यों के वशीभूत अपने जीवन को बर्बाद कर अपनी बुद्धि का गलत प्रयोग कर विनाश की ओर चला जाता है। इस बुद्धि का सही दिशा में ही प्रयोग करना चाहिए। 


बुद्धि का प्रयोग करके मनुष्य ने स्वयं को एकता के सूत्र में बांधने की जगह धर्मों, जातियों और विभिन्न पेशों में बांट लिया है तथा असंख्य विवादों को जन्म दिया है। यदि मनुष्य चाहता तो वह अपनी बुद्धि का प्रयोग करके सारी मनुष्य जाति को एकता के सूत्र में बांध कर अपना जीवन सार्थक व सफल बना सकता था किंतु उसने ऐसा नहीं किया। यदि अभी भी मनुष्य अपनी बुद्धि का प्रयोग अच्छे व नेक कार्यों में करे तो वह जीवन को कामयाब बना सकता है जो कि जीव जगत के अन्य प्राणी नहीं कर सकते।’’ शिष्य गुरु की बात से सहमत हो गया।

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