देवी भुवनेश्वरी के पूजन से जीवन में होगी ऐश्वर्य की प्राप्ति

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Sunday, November 12, 2017-1:54 PM

सोमवार दि॰ 13.11.17 को मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी के उपलक्ष में देवी भुवनेश्वरी का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। देवी भुवनेश्वरी तीनों लोकों की ईश्वरी हैं। देवी साक्षात संपूर्ण ब्रह्माण्ड को धारण कर पालन पोषण करती हैं। इन्हे जगन-माता व जगतधात्री के नाम से जाना जाता हैं। यही आकाश, वायु, पृथ्वी, अग्नि व जल, अर्थात पंचतत्व से चराचर जगत का निर्माण कर उसे संचालित करती हैं। शास्त्र इन्हे ही मूल प्रकृति कहते हैं। आद्या शक्ति भुवनेश्वरी ही परमेश्वरी शिव के लीला विलास की सहचरी हैं। देवी नियंत्रक व दंडनायक भी हैं। इनके चार हाथों में गदा, राजदंड, माला वरद मुद्रा है। इनकी भुजा व्याप्त अंकुश व नियंत्रक का प्रतीक हैं। देवी विश्व का वमन करने हेतु वामा, शिवमय होने हेतु ज्येष्ठा, जीवों को दण्डित करने हेतु रौद्री, प्रकृति का निरूपण करने हेतु मूल-प्रकृति कहलाती हैं। परमेश्वर शिव के वाम भाग को देवी भुवनेश्वरी के रूप में जाना जाता हैं तथा सदा शिव के सर्वेश्वर होने की योग्यता इन्हीं के संग होने से प्राप्त हैं। यही ऐश्वर्य की स्वामिनी हैं। इनके पूजन से जीवन में ऐश्वर्य आता है, जीवन से जटिलता दूर होती है व सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

 

पूजन विधि: शिवालय जाकर देवी भुवनेश्वरी का दशोंपचार पूजन करें। गौघृत का दीपक करें, कर्पूर जलाकर धूप करें, सफ़ेद फूल, चंदन, चावल, व इत्र चढ़ाएं, दूध व शहद चढ़ाएं, मावे का भोग लगाएं, तथा 1 माला इस विशिष्ट मंत्र जपें। पूजन के बाद भोग किसी स्त्री को भेंट करें।

 

पूजन मंत्र: ॐ श्रीभुवनेश्वर्यै नमः॥

 

पूजन मुहूर्त: शाम 16:30 से शाम 17:30 तक। (संध्या)

 

उपाय
ऐश्वर्य प्राप्ती हेतु देवी भुवनेश्वरी पर रातरानी का इत्र चढ़ाएं।

 

पारिवारिक जटिलता दूर करने हेतु देवी भुवनेश्वरी पर 12 सफेद फूल चढ़ाएं।


मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु देवी भुवनेश्वरी पर चढ़े चावल बेडरूम में छुपाकर रख दें।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

 

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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