बीकानेर में दीवाली पर उर्दू में लिखी रामायण का होता है वाचन

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You Are HereDharmik Sthal
Friday, October 20, 2017-8:48 AM

राजस्थान के बीकानेर में हर वर्ष दीवाली पर उर्दू में लिखी रामायण का वाचन होता है। यह रामायण वर्ष 1935 में लखनऊ के मौलवी बादशाह हुसैन राणा लखनवी ने बीकानेर में लिखी थी। उस जमाने में इसे गोल्ड मैडल से नवाजा गया था। आज भी इसे उर्दू में छंद में लिखी सबसे अच्छी रामायण माना जाता है। खास बात है कि यह सिर्फ  9 पृष्ठों की है। इसमें 6-6 पंक्तियों के 27 छंदों में पूरी रामायण समाई है।


गत रविवार को एक बार फिर पर्यटन लेखक संघ और महफिल-ए-अदब संस्था ने उर्दू रामायण का वाचन कराया। संस्था से जुड़े असद अली असद बताते हैं कि 1935 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक स्पर्धा हुई थी। कहा गया था कि अपनी मातृभाषा में कविता की शक्ल में रामायण लिखें। मौलवी राणा यूं तो लखनऊ के थे, लेकिन उस समय बीकानेर रियासत में महाराजा गंगा सिंह के यहां उर्दू-फारसी के फरमान अनुवाद किया करते थे। मौलवी राणा के मित्र ने उन्हें स्पर्धा के बारे में बताया। मौलवी साहिब ने रामायण नहीं पढ़ी थी, इसलिए उन्होंने एक कश्मीरी पंडित से रोज रामायण का पाठ सुना और इसे उर्दू में लिखते चले गए। इस तरह यह रामायण तैयार हुई।
 

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