सावन संक्रांति: महापुण्य काल मुहूर्त में करें ये काम, संपूर्ण पापों से मुक्त हो जाएंगे आप

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Saturday, July 15, 2017-10:37 AM

कर्क संक्रांति को 'दक्षिणायन' भी कहा जाता है इस संक्रांति में व्यक्ति को सूर्य स्मरण, आदित्य स्तोत्र एवं सूर्य मंत्र इत्यादि का पाठ व पूजन करना चाहिए जिसे अभिष्ट फलों की प्राप्ति होती है। संक्रांति में की गई उपासना से दोषों का शमन होता है। शास्त्रनुसार श्रावण संक्रांति से लेकर मकर संक्रांति के मध्य के समय उचित आहार-विहार पर विशेष बल दिया जाता है. इस समय में शहद का प्रयोग विशेष तौर पर करना लाभकारी माना जाता है। संक्रांति में व्रत, दान कर्म एवं स्नान करने मात्र से ही प्राणी संपूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है। कर्क संक्रांति सूर्य संक्रांति से सिंह संक्रांति तक का समय सावन कहलता। अतः श्रावण मास का प्रारम्भ होते यह पूरा माह शिव पूजन हेतु समर्पित है।


सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने पर "कर्क संक्रांति" अर्थात "श्रावण संक्रांति" मनाई जाती है। सावन संक्रांति से वर्षा ऋतु का आगमन माना जाता है। इसी के साथ ही देवताओं की रात्रि प्रारम्भ हो जाती है तथा चातुर्मास या चौमासा का भी आरंभ इसी समय से माना जाता है। यह समय व्यवहारिक दृष्टि से अत्यधिक कठिन होता है क्योंकि इसी समय तामसिक प्रवृतियां अधिक सक्रिय होती हैं। व्यक्ति का हृदय भी तामसिक मार्ग की ओर अधिक अग्रसर होता है। वर्षा 2017 में श्रावण संक्रांति पर्व रविवार 16.07.17 को मनाया जाएगा। संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त प्रातः 05:37 से शाम 16:37 तक रहेगा। महापुण्य काल मुहूर्त शाम 16:13 से शाम 16:37 तक रहेगा। अर्थात 24 मिनट की अवधि रहेगी। सूर्य कर्क में 16:37 पर प्रवेश करेगा। 


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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