सावन: शिवलिंग पूजन में रखें ध्यान, करोड़ वर्षों तक नरक की अग्नि में झुलसना होगा

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Sunday, July 09, 2017-9:00 AM

परमात्मा रूपी शिवलिंग की प्रत्येक व्यक्ति को पूजन आराधना करनी ही चाहिए। शिवलिंग को विधिपूर्वक स्नान करवाकर, उस स्नान वाले जल का तीन बार जो भी व्यक्ति आचमन करता है उसके तीनों अर्थात शारीरिक, मानसिक तथा वाचिक पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। शिवलिंग मिट्टी का, पत्थर का, स्वर्ण का, रजत का तथा पारे आदि का बनवाकर प्राय: पूजन किया जाता है। विविध कामनाओं की पूर्ति करने के लिए विविध सामग्रियों से शिवलिंग बनाकर पूजने की विशेषता यहां बताई जा रही है :


पारे का शिवलिंग बनाकर पूजन करने से महाऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।


स्वर्ण की धातु से बनाए शिवलिंग की यदि पूजा-अर्चना की जाए तो महामुक्ति प्राप्त होती है।


अष्टधातु से शिवलिंग का निर्माण करके यदि पूजा जाए तो सर्वसिद्धियों की प्राप्ति होती है।


रजत से बनाए गए शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से महाविभूति की प्राप्ति होती है।


नमक से यदि शिवलिंग बनाकर पूजन-अर्चना की जाए तो सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग की पूजा करने पर समस्त कार्य सिद्धि होती है। 


भस्म से निर्मित किए गए शिवलिंग की पूजा की जाए तो सभी फल प्राप्त होते हैं। 


कस्तूरी से बनाए गए शिवलिंग की पूजा करने पर पूजा करने वाला शिव सा पूज्य पाता है।


धान्य से बनाए गए शिवलिंग की पूजा की जाए तो स्त्री धन तथा पुत्र की प्राप्ति होती है।


पुष्पों का शिवलिंग बनाकर पूजन-अर्चन करने से भूमि का लाभ प्राप्त होता है।


मिश्री का शिवलिंग निर्मित करके पूजन-अर्चन किया जाए तो रोगों का नाश होकर आरोग्य की प्राप्ति होती है।


बांस के वृक्ष पर निकले हुए अंकुरों से यदि शिवलिंग बनाकर पूजन किया जाए तो वंश-वृद्धि होती है।


फलों से बनाए गए शिवलिंग की पूजा करने पर शुभा-शुभ की प्राप्ति होती है।


आंवले  के फल से शिवलिंग बना कर पूजन करने पर मुक्ति की प्राप्ति होती है।


मक्खन से शिवलिंग बनाकर पूजन-अर्चन करने पर यश, र्कीत तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


दोनों हाथों से लिंग मुद्रा बनाकर उसकी शिवलिंग की भांति पूजा की जाए तो हाथों में बरकत आ जाती है। 


गुड़ का शिवलिंग बनाकर पूजन-अर्चन करने पर महावशीकरण की प्राप्ति होती है।


लहसुनियां पत्थर का शिवलिंग बनाकर पूजन करने पर शत्रुओं को पग-पग पर विघ्न तथा मान हानि प्राप्त होती है।


अष्टलोह के शिवलिंग को बनाकर पूजन करने पर कुष्ठ रोग का नाश हो जाता है।


मोती का बनाया हुआ शिवलिंग पूजन करने पर सौभाग्य में चार चांद लगाता है।


इस पूजन में सावधानी यही रखनी होगी कि ठोस पदार्थ अर्थात शिला, रत्न तथा धातु द्वारा निर्मित किए गए शिवलिंग की पूजा-अर्चना तो सदैव एक ही शिवलिंग पर की जा सकती है परंतु दूसरी विभिन्न सामग्री से बनाए गए शिवलिंग को प्रत्येक पूजन की समाप्ति पर संहार मुद्रा द्वारा विसर्जन कर देना होगा अन्यथा अप्रत्यक्ष हानि की भी संभावना है। माना जाता है कि मिट्टी आदि के बनाए शिवलिंग में जितनी बार भी मिट्टी टूटकर गिरेगी, साधक हो या पूजक को उतने ही करोड़ वर्षों तक नरक की अग्नि में झुलसना होगा, अत: अन्य सामग्री द्वारा निर्मित शिवलिंग का विसर्जन, पूजन कार्य की समाप्ति पर कर देना चाहिए। 

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