कम ही लोग जानते हैं मौत से जुड़ा ये राज, प्राण त्यागते वक्त होता है कुछ ऐसा

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Tuesday, November 28, 2017-11:06 AM

योग के शरीर विज्ञान के अनुसार व्यक्ति के शरीर में सात चक्र होते हैं। पहला चक्र है मूलाधार और अंतिम चक्र है सहस्रार, जो सिर में होता है। इन दोनों के बीच में पांच चक्र और होते हैं। जब भी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो वह किसी एक निश्चित चक्र के द्वारा अपने प्राण त्यागता है। व्यक्ति ने किस चक्र से शरीर छोड़ा है वह उसके इस जीवन के विकास को दर्शा देता है। साधारणतया तो लोग मूलाधार से ही मरते हैं, क्योंकि जीवनभर लोग काम-केन्द्र के आसपास ही जीते हैं। 


वे हमेशा सैक्स के बारे ही सोचते हैं, उसी की कल्पना करते हैं, उसी के स्वप्न देखते हैं, उनका सभी कुछ सैक्स को लेकर ही होता है जैसे कि उनका पूरा जीवन काम-केन्द्र के आसपास ही केन्द्रित हो गया हो। ऐसे लोग मूलाधार के काम-केन्द्र से ही प्राण छोड़ते हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति प्रेम को उपलब्ध हो जाता है और काम-वासना के पार चला जाता है तो वह हृदय केन्द्र से प्राण को छोड़ता है और अगर कोई व्यक्ति पूर्णरूप से विकसित हो जाता है, सिद्ध हो जाता है तो वह अपनी ऊर्जा को, अपने प्राणों को सहस्रार से छोड़ेगा और जिस केन्द्र से व्यक्ति की मृत्यु होती है, वह केन्द्र खुल जाता है क्योंकि तब पूरी जीवन ऊर्जा उसी केन्द्र से निर्मुक्त होती है... जिस केन्द्र से व्यक्ति प्राणों को छोड़ता है, व्यक्ति का निर्मुक्ति देने वाला बिन्दु स्थल खुल जाता है।


उस बिन्दु स्थल को देखा जा सकता है। किसी दिन जब पश्चिमी चिकित्सा विज्ञान योग के शरीर विज्ञान के प्रति सजग हो सकेगा तो वह भी पोस्टमार्टम का हिस्सा हो जाएगा कि व्यक्ति कैसे मरा। अभी तो चिकित्सक केवल यही देखता है कि व्यक्ति की मृत्यु स्वाभाविक हुई है या उसे जहर दिया गया है या उसकी हत्या की गई है या उसने आत्महत्या की है - यही सारी साधारण-सी बातें चिकित्सक देखते हैं।

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