खुर्जा में विराजित हैं मां नवदुर्गा,108 परिक्रमा से पूर्ण होती संपूर्ण इच्छाएं

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Thursday, November 03, 2016-9:24 AM

जिला मुख्यालय से 25 कि.मी. दूर खुर्जा में श्री नवदुर्गा शक्ति का मंदिर स्थित है। यह मंदिर खुर्जा वाली माता के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर में मां की अष्टधातु की चार टन वजन की 27 खंड़ों में बनी प्रतिमा स्थापित है। जिसमें मां के नौ स्वरूप हैं। इस अठारहभुजा वाली प्रतिमा में भक्त मां के नौ स्वरूपों के दर्शन करते हैं। कहा जाता है कि मां की ऐसी अदभुत प्रतिमा भारत में कहीं नहीं है। 

 

मंदिर में मां के नौ स्वरूपों का श्रृंगार भी प्रतिदिन भिन्न-भिन्न होता है। नवदुर्गा के श्रृंगार से एक दिन पूर्व मां की पोशाक की पूजा होताी है। इस विग्रह को श्री दुर्गा पंचायत का रूप दिया गया है, जिसमें मां भवानी एक रथ पर कमल के आसन्न पर विराजमान हैं। मां के दाईं अोर हनुमान अौर बाई अोर भैरों जी की प्रतिमा हैं। रथ के शीर्ष पर भगवान शंकर अौर रथ के सारथी भगवान श्री गणेश हैं। 

 

मंदिर के चारों अोर परिक्रमा मार्ग का निर्माण किया गया है। इसकी 108 परिक्रमा की लंबाई श्री गोवर्धन परिक्रमा मार्ग के बराबर है। कहा जाता है कि नवरात्र के अवसर पर 108 परिक्रमा करने से श्रद्धालुअों की सारी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। यहां मंदिर में नवरात्रों में 108 परिक्रमा करने का बड़ा महत्व है। 

 

यह मंदिर दो हजार वर्ग गज में फैला है। मंदिर की ऊंचाई 30 फीट अौर इसके शिखर की ऊंचाई 60 फीट है। मंदिर के मुख्य द्वार का निर्माण इस प्रकार से किया गया है कि सड़क से ही माता के भवन के दर्शन होते हैं। मंदिर के प्रांगण में सभी दीवारों अौर छतों पर शीशे की बारीक कारीगरी की गई है। 

 

सुबह विशेष आरती के पश्चात मां का द्वार भक्तों के लिए खुल जाता है। कहा जाता है कि सुबह पांच बजे की मंगला आरती अौर मुख्य आरती से मनोकोमना पूर्ण होती है। यहां नवरात्री के अवसर पर प्रतिदिन 56 भोग लगाए जाते हैं। अष्टमी वाले दिन मां जगदम्बा को एक हजार किलो हलवे का भोग लगाया जाता है। मंदिर मं स्थापित प्रतिमा के निर्माण में एक वर्ष का समय लगा था। 


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