विदुर नीति: विद्यार्थी बच कर रहें इन आदतों से, बनती हैं सफलता में बाधक

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Sunday, July 09, 2017-12:51 PM

विदुर परम ज्ञानी और महान इंसान थे। विदुर हस्तिनापुर राज्‍य के शीर्ष स्‍तंभों में से एक अत्‍यंत नीतिपूर्ण, न्‍यायोचित सलाह देने वाले माने गए है। उनकी नीतियां जितनी उस समय में उपयोगी थी, उतनी ही आज भी हैं। विदुर नीति में लाइफ मैनेजमेंट से संबंधित सूत्र भी बताए गए हैं। विदुर नीति में ऐसी बातों के बारे में बताया है, जो विद्यार्थियों की सफलता में बाधा बनती है। विद्यार्थियों को इनसे बचकर रहना चाहिए। 

आलस्यं मदमोहौ च चापलं गोष्ठिरेव च।
स्तब्धता चाभिमानित्वं तथात्यागित्वमेव च।।
एते वै सप्त दोषा: स्यु: सदा विद्यार्थिनां मता:।।


आलस्य सफलता के रास्ते में बाधा बनता है। जो विद्यार्थी आलसी होते हैं अौर पढ़ाई में मन नहीं लगाते वे कभी भी सफलता नहीं पा सकता है। इसलिए विद्यार्थी को आलस्य त्याग कर सदैव सक्रिय रहना चाहिए।

विद्यार्थी कई बार नशे अौर मोह के नशे में फंस जाते हैं। जिसके कारण उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता अौर यही आदत उन्हें सफलता से दूर ले जाती है। 

चंचलता भी विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा दोष है। जिन विद्यार्थियों में ये गुण होता है उनका मन किसी भी काम में नहीं लगता। जिसके कारण उन्हें सफलता नहीं मिल पाती। 

कुछ विद्यार्थी मित्रों के साथ घूम फिर कर अौर बेकार की बातों में समय बर्बाद करते हैं। ऐसे विद्यार्थी कभी सफल नहीं हो पाते।

विद्यार्थी जीवन में कुछ नियम होते हैं अौर जो इन नियमों को नहीं मानते वे उद्दण्ड होते हैं। ऐसी आदत विद्यार्थियों की सफलता में बाधक बनती है। 

विदुर के अनुसार जो विद्यार्थी होशियार होते हैं उन्हें अभिमान नहीं करना चाहिए। जिस विद्यार्थी में अभिमान आ जाता है वे सही-गलत की पहचान नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण सफलता उनसे दूर चली जाती है। 

लालच बहुत बुरी बला है। विद्यार्थियों को कभी भी लालच में नहीं फंसना चाहिए। लालच विद्यार्थियो को पढ़ाई से दूर कर देती है। लालच भी विद्यार्थी की सफलता में रुकावट बनता है। 


 

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