छठ पर्व पर उमड़ी भक्तों की भीड़, कुंड में स्नान करने से ठीक होता है कुष्ठ रोग

You Are HereDharmik Sthal
Friday, November 04, 2016-12:16 PM

बिहार के औरंगाबाद जिले का सूर्य मंदिर सूर्योपासना के लिए सदियों से आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में प्रति वर्ष चेत्र अौर कार्तिक महीने में छठ व्रत करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यह मंदिर दुनिया का एकलौता पश्चिमाभिमुख सूर्यमंदिर है। सूर्य मंदिर अपनी कलात्मक भव्यता के साथ-साथ अपने इतिहास के लिए भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने किया था। 

 

काले अौर भूरे पत्थरों से निर्मित इस मंदिर की बनावट उड़ीसा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से मिलती है। कहा जाता है कि यह मंदिर बहुत प्राचीन है। मंदिर के निर्माण काल के संबंध में उसके बाहर ब्राही लिपि में लिखित अौर संस्कृत में अनुवादित एक श्लोक जड़ा है। जिसके अनुसार इलापुत्र राजा ऐल ने त्रेतायुग के 12 लाख 16 हजार वर्ष बीत जाने के बाद निर्माण आरंभ करवाया था। 

 

मंदिर में 7 रथों से सूर्य की उत्कीर्ण प्रस्तर प्रतिमाएं अपने तीनों स्वरूपों उदयाचल-प्रातः सूर्य, मध्याचल-मध्य सूर्य और अस्ताचल सूर्य-अस्त सूर्य के रूप में विद्यमान हैं। यह मंदिर एकमात्र ऐसा सूर्य मंदिर है जो पूर्वाभिमुख न होकर पश्चिमाभिमुख है। मंदिर में भगवान शिव की जांघ पर बैठी मां पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा है। सूर्यदेव मंदिर दो भागों में बना हुआ है। पहला गर्भ गृह जिसके ऊपर कमल के आकार का शिखर है। शिखर के ऊपर सोने का कलश है। दूसरा भाग मुखमंडप है, जिसके ऊपर पिरानिडनुमा छत अौर छत को सहारा देने के लिए नक्काशीदार पत्थरों से बना स्तंभ है। 

 

सूर्य पुराण के अनुसार एल राजा ऋषि के श्राप से कुष्ठ रोग से पीड़ित थे। वे एक बार शिकार करने गए अौर रास्ता भटक गए। भूखे प्यासे राजा को एक सरोवर दिखाई दिया जहां वे उसके किनारे गए अौर उन्होंने अंजुरी में पानी भर कर पानी पिया। वह हैरान हो गया कि जिन जगहों को पानी का स्पर्श हुआ वहां से श्वेत दाग ठीक हो गए। ये देखकर राजा वस्त्रों सहित पानी में लेट गए जिससे उनके पूरे शरीर के दाग ठीक हो गए। 
कहा जाता है कि पवित्र सूर्य कुंड में स्नान के बाद अर्घ्य देने से शरीर से सम्बंधित सारे रोग दूर होते हैं। यही कारण है की प्रत्येक वर्ष लाखों लोग यहां आते हैं और इस सूर्यकुंड  में स्नान करते हैं। मंदिर में पूरा वर्ष भक्त सूयदेव के दर्शनों के लिए आते हैं, लेकिन छठ पर्व पर यहां लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। 


 


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