रावण वध के बाद ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति हेतु श्रीराम ने इस मंदिर में किया था स्नान(Pics)

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Sunday, November 06, 2016-1:31 PM

अहमदाबाद से लगभग सौ कि.मी. की दूर पुष्पावती नदी के तट पर मोढ़ेरा का विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सम्राट भीमदेव सोलंकी प्रथम ने करवाया था। इस बात की पुष्टि मंदिर के गर्भगृह की दीवार पर लगे एक शिलालेख से होती है, जिसमें लिखा गया है- ‘विक्रम संवत 1083 अर्थात् (1025-1026 ईसा पूर्व)।’

 

यह वही समय था जब सोमनाथ अौर उसके आस-पास के क्षेत्रों को महमूद गजनी ने अपने कब्जे में कर लिया था। महमूद गजनी के आक्रमण के कारण सोलंकी साम्राज्य की राजधानी अहिलवाड़ पाटण की महिमा, गौरव और वैभव भी क्षीण होता जा रहा था। इसी गौरव की पुनर्स्थापना के लिए सोलंकी राज परिवार और व्यापारियों ने एकजुट होकर संयुक्त रूप से भव्य मंदिरों का निर्माण करना आरंभ कर दिया। 

 

सोलंकी सूर्यवंशी होने के कारण सूर्यदेव को कुलदेवता के रुप में पूजते थे। इसलिए उन्होंने अपने अराध्य की आराधना के लिए मोढ़ेरा में भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण किया। यह मंदिर ईरानी शैली में निर्मित है। इसे भीमदेव ने तीन भागों में बनवाया था। इसका प्रथम भाग गर्भगृह, दूसरा सभामंडप और तीसरा सूर्य कुण्ड है। मंदिर के गर्भगृह के अंदर की लंबाई 51 फुट 9 इंच तथा चौड़ाई 25 फुट 8 इंच है। सूर्यमंदिर के सभामंडप में कुल 52 स्तंभ हैं। इन स्तंभों पर विभिन्न देवी-देवताओं के चित्रपटों और रामायण तथा महाभारत के प्रसंगों की नक्काशी की गई है। स्तंभों को नीचे की ओर देखने पर ये अष्टकोणाकार और ऊपर की ओर देखने पर ये गोल दिखाई देते हैं। 

 

मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार से किया है कि जिसमें सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को प्रकाशित करती है। सभामंडप के आगे एक बड़ा कुंड है। इस कुंड को सूर्यकुंड या रामकुंड कहा जाता है। 

 

पुराणों में भी मोढ़ेरा का उल्लेख मिलता है। स्कंद अौर ब्रह्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में मोढ़ेरा के आस-पास के पूरे क्षेत्र को 'धर्मरन्य' के नाम से जाना जाता था। पुराणों के अनुसार रावण संहार के पश्चात श्रीराम ने गुरु वशिष्ट को ऐसे स्थान के बारे में बताने के लिए कहा, जहां जाकर उन्हें आत्मिक शुद्धि अौर ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिल सके। तब गुरु ने श्रीराम को  'धर्मरन्य' जाने की सलाह दी। आज यह क्षेत्र मोढ़ेरा के नाम से प्रसिद्ध है। इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर की स्थापत्य कला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरे मंदिर के निर्माण में जुड़ाई के लिए कहीं भी चूने का उपयोग नहीं किया गया है। देश के किसी भी कोने से रेल, सड़क या हवाई मार्ग द्वारा अहमदाबाद पहुंचकर वहां से सड़क मार्ग द्वारा मोढ़ेरा पहुंचा जा सकता है।
 


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