ये है संबंध नष्ट करने का शर्तिया तरीका, पति-पत्नी रखें ध्यान कहीं कर तो नहीं रहे ये भूल

  • ये है संबंध नष्ट करने का शर्तिया तरीका, पति-पत्नी रखें ध्यान कहीं कर तो नहीं रहे ये भूल
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Tuesday, July 11, 2017-1:31 PM

रिश्ते की प्रकृति चाहे जो हो, उसका बुनियादी पहलू यही है कि आप कुछ जरूरतें पूरी करना चाहते हैं। हमने कोई रिश्ता क्यों बनाया, इसके लिए हम तमाम दावे कर सकते हैं, अगर हमारी जरूरतें और उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो रिश्ता बिगड़ जाएगा। जब जरूरतें बदल जाती हैं तो दोनों लोगों के बीच जो चीज पहले बहुत मायने रखती थी, उसी चीज का थोड़े समय बाद वैसा महत्व नहीं रह जाता। मगर हमें रिश्ते को हमेशा उन्हीं पुरानी जरूरतों पर टिकाकर नहीं रखना चाहिए और यह नहीं सोचना चाहिए कि अब रिश्ते खत्म हो गए।


मान लीजिए, आपने अपने बगीचे में एक नारियल और एक आम का पेड़ लगाया। जिस वक्त आपने ये दोनों पौधे लगाए, उनकी ऊंचाई बराबर थी। आपको लगा कि वे दोनों प्रेमपूर्वक साथ-साथ बड़े होंगे। अगर इन दोनों पौधों को काट-छांट कर बौना बनाकर रखा जाए और उन्हें बड़ा न होने दिया जाए तो वे एक-दूसरे के बराबर बने रहेंगे लेकिन अगर उन दोनों को अपने तरीकों से बढऩे दिया जाए तो उनकी ऊंचार्ई, आकार और संभावनाएं सब कुछ अलग-अलग होंगी।


इसी तरह अगर आप दो लोगों के बीच बराबरी की मांग करते हैं तो रिश्ता टूटेगा ही। आखिरकार एक आदमी और औरत एक-दूसरे के करीब आते ही इसलिए हैं क्योंकि वे अलग हैं। तो यह उन दोनों के बीच का अंतर ही है, जो उन्हें करीब लाता है। जैसे-जैसे इंसान विकास करने लगता है, यह अंतर बढ़ता जाता है और साफ तौर पर उभरकर सामने आता है। जब तक आप बड़े होने के साथ आने वाले अंतर को स्वीकार करना, पसंद करना नहीं सीखेंगे, आपके रिश्ते के बीच एक दूरी पैदा होती जाएगी।


अगर आप यह उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों लोग एक ही दिशा में एक ही तरह से बढ़ें, तो आप उन दोनों के साथ ही ज्यादती कर रहे हैं। इससे उन दोनों को ही जीवन में बंदिश और घुटन महसूस होगी। ऐसी उम्मीद करना कि आपका जीवन-साथी बिल्कुल आपके जैसा ही हो, संबंध नष्ट करने का शर्तिया तरीका है। अपने और अपने साथी के बीच मौजूद अंतरों को स्वीकार कीजिए, उन्हें विकसित होने दीजिए, उनका आनंद लीजिए। 


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