सूर्य पूजा के ये आसान उपाय सुख-सफलता की राह को बना देंगे आसान

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Saturday, November 11, 2017-11:31 AM

सूर्य जो अंधकार को दूर करने वाले और रोशनी प्रदान करने वाले साक्षात देव है। हिंदू  धर्म में इन्हें सूर्य देव की संज्ञा दी गई है। धार्मिक आस्था है कि इतनी नित्य पूजन से मनुष्य को समृद्धि, मान-सम्मान यश की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन इनकी पूजा से व्यक्ति में आस्था और विश्वास पैदा होता है। शास्त्रों के मुताबिक निरंतर कर्म ही धर्म है, की सीख व भावना के साथ रविवार को सूर्यदेव की उपासना से रोगमुक्त, ऊर्जावान और ऊंचा ओहदा पाकर शक्ति संपन्नता प्राप्त होती है। शास्त्रों में रविवार को खासतौर पर सूर्य नमस्कार और प्रदक्षिणा सहित सूर्य पूजा के ये उपाय बहुत ही शुभ फलदायी बताए गए हैं। जानिए, क्या हैं इनके लाभ

 

सूर्य पूजा, सूर्य स्त्रोत का पाठ, सूर्य मंत्र का जप करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं। 

 

सूर्य गायत्री: ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात।

 

सूर्य बीज मंत्र: ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: ऊंभूभुर्व: स्व: ऊं आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतम्मर्तंच। हिण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन ऊं स्व: भुव: भू: ऊं स: ह्रौं ह्रीं ह्रां ऊं सूर्याय नम:॥

 

सूर्य जप मंत्र: ऊं ह्रां ह्रीँ ह्रौं स: सूर्याय नम:। 

 

सूर्य देव को नमस्कार करते हुए सिर को भूमि पर स्पर्श करने से सारे पापों का नाश हो जाता है।

 

सूर्य देव की पूजा के बाद तन-मन की पवित्रता के साथ परिक्रमा से रोगों से मुक्ति मिलती है। पावनता के लिये नंगे पैर ही परिक्रमा लगाएं। 

 

रविवार को सूर्य की लाल फूलों या सफेद कमल से पूजा, व्रत-उपवास रखने से सूर्य कृपा इंसान को तमाम ख्याति, सफलता व सुखों से समृद्ध कर देती है। 

 

सूर्य की निरंतर पूजा से व्यक्ति निडर और बलवान बनता है।


सूर्य पूजा व्यक्ति के न से अहंकार, क्रोध, कपट, लोभ, इच्छा और बुरे विचारों का नाश कर देता है।

 

सुबह सूर्यदेव के जल अर्पित करने के उपरांत जमीन पर पड़े जल को अपनी आंखों की पुतलियों पर लगाएं।

 

सूर्य देव से मंगलकामना करें और अपने मस्तिक पर लाल चंदन का तिलक लगाएं।

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