एकादशी के दिन करेंगे ये काम, स्वर्गलोक में स्थित पितर होंगे तृप्त

  • एकादशी के दिन करेंगे ये काम, स्वर्गलोक में स्थित पितर होंगे तृप्त
You Are HereDharm
Wednesday, July 19, 2017-6:45 AM

एकादशी व्रत में तुलसी पूजन की महिमा अपार है। इस व्रत में तुलसी एवं तुलसी मंजरी से भगवान का पूजन करना अति उत्तम है। भगवान को तुलसी अति प्रिय है इसी कारण वह हीरे, मोती, मणियों आदि से पूजित किए जाने पर भी इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी के एक पत्ते से। तुलसी मंजरी से किए गए पूजन से जीव के जन्म जन्मांतरों के पाप मिट जाते हैं। तुलसी सौभागयदायक एवं विपत्तिविनाशक है। शास्त्रानुसार जैसे गंगा कोई साधारण नदी नहीं बल्कि श्रेष्ठ तीर्थ है वैसे ही तुलसी कोई पौधा नहीं बल्कि भगवान के साक्षात दर्शन हैं। हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा लगाना अति शुभदायक है तथा प्रत्येक कर्मकाण्ड में तुलसी का होना उत्तम माना जाता है। जिस स्थान पर तुलसी का पौधा होता है वहां ब्रह्मा विष्णु, महेश के साथ ही समस्त देवों का वास रहता है, इसी कारण तुलसी पूजन करने से ही सभी देवों के पूजन का फल एक साथ मिल जाता है।


पदमपुराण के अनुसार तुलसी की महिमा अपार है। इसके दर्शन करने मात्र से ही जीव के सभी प्रकार के पाप मिट जाते हैं, तुलसी को स्पर्श करने से शरीर पवित्र हो जाता है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण होता है, जल से सींचने पर यह यमराज के भय को मिटाती है तथा तुलसी रोपित करने पर प्रभु के समीप ले जाती है। इसके अतिरिक्त तुलसी दल से पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।


रात्रि जागरण एवं दीपदान की महिमा- जो मनुष्य एकादशी के दिन मंदिर जाकर नियम से प्रात: और सांय दीपदान करता है उसके पुण्यफल की गिनती चित्रगुप्त भी नहीं कर सकते। भगवान श्रीकृष्ण के सामने जो दीपक जलाते हैं, उनके पितर स्वर्गलोक में स्थित होकर अमृतपान से तृप्त होते हैं। इस दिन गाय के घी अथवा तिल के तेल से दीपदान करना चाहिए। रात्रि को जागरण करने वाले भक्त प्रभु को अति प्रिय होते हैं ।

वीना जोशी
veenajoshi23@gmail.com

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!

Recommended For You