जीवनभर की गरीबी मिटाएगा खुले दिल से किया गया ये काम

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Tuesday, July 25, 2017-12:26 PM

किसी नगर में एक भिखारी भीख मांगने निकला। वह पहली बार इस नगर में भीख मांगने आया था और उसे यहां से अच्छी भीख मिलने की उम्मीद थी। वह नगर में सुबह से शाम तक भीख मांगता रहा, पर उसे वहां बस कुछ मुट्ठी अनाज ही मिला। शाम को वह मायूस होकर वापस अपने घर लौट रहा था कि तभी उसे उस नगर के राजा की सवारी आती हुई दिखाई दी। वह भी राजा की सवारी देखने रुक गया। जब राजा की सवारी उसके नजदीक आई तो वह यह देखकर हक्का-बक्का रह गया कि राजा अपने रथ से उतरकर उसी ओर बढ़ा चला आ रहा है।


उसके मन में कई तरह की शंकाएं जन्म लेने लगीं। राजा उस भिखारी के पास आया और उसके सामने हाथ फैलाते हुए बोला, ‘‘मुझे आपसे कुछ भीख चाहिए।’’ 


यह सुनकर भिखारी के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। आखिर जिसका पूरे राज्य पर हक है और जो सबका पेट भर सकता है, वह एक भिखारी से भीख मांग रहा है! राजा ने उसकी शंका का निवारण करते हुए कहा, ‘‘दरअसल राजज्योतिषी ने बताया है कि राज्य पर संकट आने वाला है। उन्होंने मुझ से कहा कि आज मार्ग में जो पहला भिखारी मिले, उससे मैं भीख मांगू तो संकट टल जाएगा। इसलिए मना मत करना।’’  


राजा की बात सुनकर भिखारी ने अपनी झोली में हाथ डाला और मुट्ठी भरकर अनाज निकालने लगा। तभी उसके मन में ख्याल आया कि इतना-सा तो अनाज मिला है। यदि राजा को मुट्ठी भर अनाज दे दूंगा तो घर क्या ले जाऊंगा। यह सोचकर उसने मुट्ठी ढीली की और अनाज के कुछ दाने निकाल राजा के हाथ में थमा दिए। भिखारी ने घर पहुंचकर पत्नी से कहा, ‘‘आज तो अनर्थ हो गया। मुझे भीख देनी पड़ी। पर न देता तो क्या करता।’’ 


पत्नी ने झोली को उलटा किया तो उसमें एक सोने का सिक्का निकला। यह देखकर भिखारी पछताते हुए बोला, ‘‘काश, मैं राजा को अनाज देने में संकोच न करता। यदि मैंने उसे पूरा अनाज दे दिया होता तो आज मेरी जीवनभर की गरीबी मिट जाती।’’ 


इस प्रतीकात्मक कथा का संकेत यह है कि दान देने से संपन्नता हजार गुना बढ़ती है। यदि हम उदारतापूर्वक दान करें तो प्रतिफल में किसी न किसी दीर्घ लाभ की प्राप्ति होगी।

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