आपको भी चिंता सताती है, एक क्लिक में पाएं समाधान

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Monday, April 17, 2017-2:38 PM

क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य कैसे चलता है, पृथ्वी कैसे घूमती है। यदि नहीं सोचा है तो इसके बारे में सोचें। यदि नहीं सोचा है तो फिर चिंता क्यों करते हैं? यदि कुछ समझ में नहीं आ रहा है तो इसका मतलब यह हुआ कि आप अकारण चिंता करते हैं। वस्तुत: चिंता हमारे बीते जीवन की वे घटनाएं हैं, जिन्हें हम कभी भुला नहीं पाते हैं और जब हम इन्हें भुला नहीं पाते हैं तो हमारा वर्तमान इनसे प्रभावित होने लगता है। वर्तमान के प्रभावित होते ही हमारा भविष्य नष्ट होने लगता है।


कवि जयशंकर प्रसाद ने ‘कामायनी’ में एक बड़ी अच्छी बात लिखी है-‘‘प्राणी निज भविष्य की चिंता में, वर्तमान का सुख छोड़े। दौड़ चला है बिखराता-सा, अपने ही पथ में रोड़े।’’ 


आशय यह है कि जो भविष्य है ही नहीं, हम उसके बारे में चिंता में लगे रहते हैं। जो बीत गया, उसके बारे में चिंता करते रहते हैं। इस प्रकार हम अपना वर्तमान भी खराब कर लेते हैं। 


आज हम कितना कुछ एकत्र कर रहे हैं, यह सोचकर कि हमें कल सुख मिलेगा लेकिन इसके लिए आज कष्ट झेल रहे हैं। इससे भी अधिक कोई कष्ट आने वाला है क्या? यदि आने वाला है तो हम सहेंगे। हम अपने ही पथ में रोड़े बिखेर रहे हैं और दौड़ते चले जाते हैं।


हम ऐसा क्यों नहीं कर पा रहे हैं कि भविष्य की चिंता छोड़ वर्तमान में जीएं। हम तो प्रत्येक चीज में नकारात्मक होते चले जा रहे हैं। यह काम हमसे नहीं होगा, वह काम हमसे नहीं होगा। तो फिर किससे होगा? प्रयास करने में क्या बुराई है। हम प्रयास करेंगे, काम होना होगा तो होगा, नहीं होना होगा तो नहीं होगा। विज्ञान की प्रयोगशाला में भी प्रयोग होते रहते हैं। किसी प्रयोग का परिणाम जीवन भर नहीं मिलता, फिर भी काम चालू रहता है। दूसरे वैज्ञानिक इसके परिणाम को तलाश ही लेते हैं।

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