यहां शनि स्तोत्र पढ़ते हुए परिक्रमा करने से मिलती है शनिदोषों से मुक्ति

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Friday, September 02, 2016-10:08 AM

उत्तर प्रदेश में ब्रजमंडल के कोसीकलां गांव के पास शनिदेव का मंदिर स्थित है। यह मंदिर कोसी से 6 कि.मी. दूर  अौर नंद गांव के समीप है। यह मंदिर अन्य शनिमंदिरों में से एक हैं। 

 

माना जाता है कि यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के समय से यहां स्थापित है। एक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय सभी देवतागण उनके दर्शनों हेतु आए। उनके साथ शनिदेव भी आए लेकिन मां यशोदा अौर नंदबाबा ने शनिदेव की वक्र दृष्टि के कारण उन्हें श्रीकृष्ण के दर्शन नहीं करवाए। जिसके कारण शनिदेव बहुत आहत हुए। भगवान श्रीकृष्ण ने शनिदेव के दुख को समझ कर उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए अौर कहा कि नंदगांव से उत्तर दिशा में एक वन है वहां जाकर उनकी भक्ति करने पर वह उन्हें स्वयं दर्शन देंगे।

 

शनिदेव ने वहां जाकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की। जिससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने शनिदेव को कोयले के स्वरुप में दर्शन दिए। इसी कारण इस वन का नाम कोकिलावन पड़ा। मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण ने शनिदेव से कहा था कि वह इसी वन में विराजे अौर यहां विराजने से उनकी वक्र दृष्टि नम रहेगी। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शनिदेव से कहा था कि मैं राधा जी के साथ आपके बाईं दिशा में विराजमान रहूंगा। यहां आने वाले भक्तों की परेशानियां शनिदेव को दूर करनी होंगी अौर कलयुग में उनसे अधिक शनिदेव की पूजा की जाएगी। जो भी भक्त पूरी श्रद्धाभक्ति के साथ इस वन की परिक्रमा करेगा उसे शनिदेव कभी कष्ट नहीं पहुचाएंगें। कहा जाता है कि यहां राजा दशरथ द्वारा लिखा शनि स्तोत्र पढ़ते हुए परिक्रमा करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।

 

कोसीकलां जाने के लिए मथुरा सबसे सरल मार्ग है। कोसीकलां मथुरा- दिल्ली नेशनल हाइवे पर मथुरा से 21 किलोमीटर दूर है। कोसीकलां से नंदगांव तक एक सड़क जाती है। वहां से कोसीकलां वन आरंभ हो जाता है।

 


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