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बजट 2018 : रिटेल सैक्टर को मिले इंडस्ट्री का दर्जा

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Thursday, January 25, 2018-11:09 AM

नई दिल्ली : करीब 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार देने का दावा करने वाले रिटेल सैक्टर को भी बजट से कई उम्मीदें हैं। बड़े सुधार के तौर पर रिटेल कम्पनियां चाहती हैं कि सैक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा मिले और सरकार मल्टी-ब्रांड रिटेल में 2017 में देश के सबसे बड़े इनडायरैक्ट टैक्स रिफॉर्म यानी जी.एस.टी. ने रिटेल सैक्टर की तस्वीर बदल दी। एक्साइज और वैट समेत कई अन्य टैक्सों की मार झेल रहा रिटेल सैक्टर अब एक टैक्स के दायरे में आ गया है। अब रिटेल सैक्टर की मांग है कि जी.एस.टी. दरों में बार-बार होने वाले बदलाव को बंद किया जाए।

एफ.डी.आई. निवेश की सीमा 49 प्रतिशत तक बढ़ाने पर हो विचार
देश में कंजम्पशन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाने वाले रिटेल सैक्टर ने एक बार फिर सैक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा देने की मांग की है। इंडस्ट्री का दर्जा मिलने पर इंडस्ट्रियल पार्क में जमीन और बिजली सहित कई चीजों में सहूलियत मिलेगी। रिटेल कम्पनियां चाहती हैं कि सरकार मल्टी ब्रांड रिटेल में भी ऑटोमैटिक रूट के जरिए एफ.डी.आई. निवेश की सीमा 49 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार हो।

ट्रांसिशनल स्टॉक्स पर मिलने वाले इनपुट टैक्स क्रैडिट की सीमा बढ़ाई जाए
इसके अलावा ट्रांसिशनल स्टॉक्स पर मिलने वाले इनपुट टैक्स क्रैडिट की सीमा को भी 1 साल तक बढ़ाने की मांग हो रही है। डीम्ड एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए जी.एस.टी. रिफंड और छोटे रिटेलर्स को ऑर्गेनाइज्ड सैक्टर में लाने के लिए डिजिटल ट्रांजैक्शन पर इंसैंटिव और टैक्स रिबेट की भी मांग है। कृषि के बाद रिटेल सैक्टर देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला सैक्टर माना जाता है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि रिटेल सैक्टर की मांगों को पूरा करके सरकार जॉब क्रिएशन और कंजम्पशन के जरिए जी.डी.पी. ग्रोथ को आसानी से बढ़ा सकती है।

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