नेहरू ने दी थी अमेरिकी जासूसी विमान को उड़ान भरने की अनुमति: रिपोर्ट

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Saturday, August 17, 2013-1:56 AM

वाशिंगटन: चीन से 1962 में युद्ध में पराजय झेलने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिका के यू-2 जासूसी विमान को तिब्बत एवं सीमावर्ती इलाकों में उड़ान भरने की अनुमति देने के साथ ही भारतीय आकाश में ईंधन भरने की अनुमति दी थी। इस जानकारी का खुलासा सीआईए के नए वर्गीकृत दस्तावेज से हुआ है।

जार्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा अभिलेखागार द्वारा शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नेहरू ने 11 नवंबर 1962 को चीन से लगती सीमा क्षेत्रों में यू-2 मिशन को उड़ान भरने की अनुमति प्रदान की थी। यह दस्तावेज विश्वविद्यालय ने सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) के यू-2 जासूसी विमान कार्यक्रम के बारे में लोक अभिलेख आग्रह के तहत हासिल किया है।

यू-2 विमानों को थाईलैंड के ताखली वायुसेना अड्डे से तिब्बत और भारत-चीन सीमा के ऊपर उड़ान भरने, भारत के ऊपर तेल भरने की सुविधा के साथ-साथ चारबतिया वायुसेना अड्डे में दो तैनाती की अनुमति देने संबंधी 1964 में भारत के साथ हुआ करार अब गैर वर्गीकृत है।

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान के ओडिशा में कटक के समीप वीरान पड़े चारबतिया अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति देने संबंधी करार अमेरिकी राष्ट्रपति जान एफ. केनेडी और भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णनन के बीच 3 जून 1963 को हुआ था। लेकिन इस अड्डे की दशा सुधारने में भारत को ज्यादा समय लगा इसलिए अभियान ताखली से संचालित हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक 10 नवंबर 1963 को अभियान के तहत यू-2 ने सबसे लंबी अवधि, 11 घंटे 45 मिनट की उड़ान भरी थी। इस उड़ान में चालक इतने थक गए थे कि अभियान के प्रबंधकों ने भविष्य की उड़ानों का समय 10 घंटे सीमित कर दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नेहरू की मौत के कारण चारबतिया में पहली तैनाती मई 1964 में खत्म कर दी गई। रिपोर्ट में चूकवश नेहरू को राष्ट्रपति लिखा गया है।


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