शरीफ ने फांसी की सजा के अमल पर रोक लगाई

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Monday, August 19, 2013-1:07 AM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ चर्चा किए जाने तक कई कट्टरपंथी आतंकवादियों सहित अन्य लोगों की मौत की सजा के क्रियान्वयन पर फौरन रोक लगाने का आज एक आदेश जारी किया।

जरदारी ने शरीफ को पत्र लिखा था कि वह लश्कर-ए-झंगवी (एलईजे) के दो दुर्दांत आतंकवादियों को अगले हफ्ते फांसी दिए जाने के विषय पर चर्चा करना चाहते हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इनकी मौत की सजा के क्रियान्वयन को रद्द करने की मांग की है।

एलईजे के दो आतंकवादियों अत्ताउल्ला उर्फ कासिम और मुहम्मद आजम उर्फ शरीफ को जुलाई 2004 में एक आतंकवाद निरोधक अदालत ने एक शिया चिकित्सक की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया था। उन्हें इस साल 20 से 22 अगस्त के बीच फांसी पर चढ़ाया जाना था।

स्थानीय चैनलों ने एक आधिकारिक प्रवक्ता के हवाले से कहा कि मौत की सजा के क्रियान्वयन की तिथि नजदीक आ रही थी और राष्ट्रपति के देश से बाहर रहने के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने गृह मंत्रालय को आदेश दिया कि जरदारी के साथ उनकी मुलाकात होने तक सजा का क्रियान्वयन रोक दिया जाए।

एक बयान में कहा गया है कि जरदारी के विदेश से लौटने पर शरीफ के साथ चर्चा होने तक यह रोक कायम रहेगी।

अगर पीएमएल-एन की सरकार फांसी दिए जाने का फैसला करती है तो पांच साल से फांसी पर लगाई गई रोक खत्म हो जाएगी। यह रोक जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की पिछली सरकार ने लगाई थी।

प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी खबरें गलत हैं कि राष्ट्रपति ने मौत की सजा पर रोक लगाई है। कल राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने पीटीआई से कहा था कि जरदारी दो आतंकवादियों की फांसी के बारे में प्रधानमंत्री के साथ चर्चा करना चाहते हैं।

पाकिस्तान सरकार ने पंजाब प्रांत में एक कैदी की मौत की सजा के क्रियान्वयन पर भी अंतिम क्षणों में रोक लगा दी।

प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजकर कहा था कि वह सैकड़ों कैदियों की लंबे समय से लंबित मौत की सजा के मुद्दे पर शरीफ के साथ चर्चा करना चाहते हैं।

ह्यूमन राइट्स वाच और इंटरनेशनल कमिटी ऑफ जूरिस्ट्स ने पीएमएल एन सरकार को एक खुला पत्र भेजकर मौत की सजा पर लगी रोक का नवीकरण करने को कहा है।

जून 2008 में जरदारी द्वारा रोक लगाए जाने के बाद से सिर्फ एक सैनिक को फांसी से 2012 में लटकाया गया।

आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक पाकिस्तान में 7,000 से अधिक कैदी मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान में मौत की सजा खत्म किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।


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