शरीफ को लेकर पाकिस्तानी तालिबान में पडी दरार

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Monday, August 26, 2013-3:26 AM

इस्लामाबादः वर्ष 2007 में 13 आतंकवादी समूहों के गठजोड़ से बने प्रतिबंधित कुख्यात आतकंवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के एक बयान ने उसे अलग अलग खेमों में बांट दिया है।

दरअसल गत सोमवार को श्री शरीफ ने टेलीविजन पर पहली बार राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था जिसमें उन्होंने आतंकवादियों को बातचीत की पेशकश की थी। टीटीपी की पंजाब इकाई के प्रमुख इस्मतुल्लाह मोआविया ने श्री शरीफ के इस बयान के समर्थन में कबायली जिले दक्षिणी वजीरिस्तान में पर्चे बंटाये थे जिसके बाद उसें प्रमुख पद से हटाने की घोषणा कर दी गई। जैश-ए-मोहम्मद के सक्रिय सदस्य रहे मोआविया ने ही पंजाब के मिरानशाह में टीटीपी की पंजाब
ईकाई की स्थापना की थी।

मोआविया को प्रमुख के पद से हटाने के साथ ही टीटीपी के नेता दो धडों में बंट गये। पंजाब इकाई के कई शीर्ष नेता उस्ताद आलम, उस्ताद अली, नईम बुखारी, कारी जुबैर आदि ने मोआविया का समर्थन किया है। अब पाकिस्तानी तालिबान दो टुकडों में बंटकर टीटीपी शूरा और टीटीपी पंजाब के नाम से जाना जा रहा है।

टीटीपी का कहना है कि मोआविया का वह सम्मान करता है लेकिन उसने श्री शरीफ के बयान का समर्थन करने से पहले मुख्य संगठन को इसकी कोई जानकारी नहीं दी। इसके पहले भी टीटीपी के कई नेता मोआविया से नाराज थे। उनके मुताबिक जिस मकसद के साथ पंजाब ईकाई का गठन किया गया था। मोआविया अब उसके लिये काम नहीं कर रह था।
 
टीटीपी के मुताबिक पंजाबी तालिबान का काम मुख्य सरकारी संस्थानों, विदेशी प्रतिनिधियों और पंजाब के शिया समुदाय को निशाना बनाना था लेकिन पिछले कई महीनों से मोआविया इससे कतरा रहा था। टीटीपी के एक शीर्ष नेता के मुताबिक मोआविया ताकत का इस्तेमाल करने के साथ लक्ष्य को पाने के लिये बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता था जो संगठन के कई लोगों को पसंद नहीं थी।

टीटीपी के एक अन्य नेता ने बताया कि पाकिस्तान तालिबान के लगभग 70 प्रतिशत नेता मोआविया का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक संगठन को सरकार से बातचीत करके लक्ष्य प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिये।

उधर, टीटीपी के प्रवक्ता शाहीदुल्लाह शाहिद ने कहा है कि टीटीपी जल्द ही पंजाब ईकाई के लिये नये प्रमुख के नियुक्ति की घोषणा करेगा। लेकिन मोआविया ने पाकिस्तानी तालिबान के इस बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पंजाबी तालिबान एक स्वतंत्र ईकाई है और पाकिस्तान तालिबान को इसके बारे में निर्णय लेने का कोई हक नहीं है।


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