ताकतवर अर्थव्यवस्था को कठोर संदेश देने के हक में है भारत

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Thursday, September 05, 2013-1:05 AM

प्रधानमंत्री के विशेष विमान सेः भारत ने आज कहा कि वह उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर से विकसित देशों को यह कठोर संदेश देने के हक में है कि उन्हें ऐसी नीतियों को सुनियोजित तरीके से अलविदा कहना होगा जो उनकी सरहदों के बाहर असर डालती हों और विकासशील देशों की अर्थ व्यवस्थाओं को प्रभावित करती हों।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वह उभरती अर्थ व्यवस्थाओं के मंच ग्रुप-20 के शिखर सम्मेलन में भारत के इस रूख को पुरजोर ढंग से रखेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की गैर परंपरागत मौद्रिक नीतियां विकासशील दुनिया को प्रभावित कर रही है।

प्रधानमंत्री के साथ इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव डा. अरविंद मायाराम ने भारत के रूख को स्पष्ट करते हुए कहा कि जी-20 की घोषणा में भारत इस बात की उम्मीद लगाए हुए है कि सरहद के बाहर उसर रखने वाली गैर परंपरागत नीतियों पर विकसित देश अंकुश लगाएं और ऐसे व्यापार व्यवधान पैदा न करें जिनसे उभरती अर्थ व्यवस्थाओं पर चोट हो। उन्होंने कहा कि जी-20 कोई निर्णय लेने वाला मंच नहीं है और वहां से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति बनने की उम्मीद की जाती है।

श्री मायाराम ने इन भविष्यवाणियों को नकार दिया कि आने वाले तीन वर्ष में भारत की आर्थिक साख गिरेगी और इसमें करीब 33 प्रतिशत गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की भविष्यवाणी के जितने भी पैमाने है उनके हिसाब से इस भविष्यवाणी पर विश्वास करने को कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में विकास मंद हो रहा है और यदि आर्थिक साख इस पैमाने पर गिरने की भविष्यवाणी है तो फिर यह ग्लोबल गिरावट होगी।

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