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30 फीसदी चीनी नहीं बोल पाते अपनी मातृ भाषा

  • 30 फीसदी चीनी नहीं बोल पाते अपनी मातृ भाषा
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Friday, September 06, 2013-11:51 AM

बीजिंग: विकास के क्षेत्र में चीन दुनिया में सबसे तेज दौड़ रहा है लेकिन मातृभाषा सीख पाने के मामले में वह फिसड्डी साबित हो रहा है। चीन में 40 करोड़ से अधिक लोग अपनी मातृ भाषा मंदारिन नहीं बोल पाते। सरकारी मीडिया के अनुसार मंदारिन ठीक से न बोल पाने वालों की भी भारी तादाद है। चीन की सत्तारुढ कम्युनिस्ट पार्टी देश को एकजुट रखने के लिए मंदरिन को कई दशकों से प्रोत्साहित कर रही है।

हालांकि देश की विशालता और शिक्षा के क्षेत्र खासकर गरीब ग्रामीण इलाकों में निवेश की कमी के कारण उसके प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पूरे देश के लोग मंदारिन बोल सकें, ऐसा संभवत: कभी नहीं हो पाएगा। मंदारिन को औपचारिक रूप से पुतोनघुआ के नाम से पुकारा जाता है, इसका मतलब ‘आम बोली’ है। शिक्षा विभाग की प्रवक्ता शू मी ने बताया कि देश के मात्र 70 प्रतिशत लोग मंदारिन बोल पाते हैं। इनमें से काफी लोग इसे अच्छी तरह से बोल नहीं पाते।

शेष 30 प्रतिशत या 40 करोड से अधिक लोग इसे बिल्कुल नहीं बोल पाते। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार शू ने कहा कि देश में मंदारिन को प्रोत्साहित करने के लिए अभी और निवेश की जरुरत है। शू का यह बयान मंदारिन को प्रोत्साहित करने के वाॢषक अभियान से पहले आया है। यह अभियान 1998 से चल रहा है। शू ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय इस वर्ष देश के दूरदराज के क्षेत्रों और जातीय अल्पसंख्यक इलाकों में मंदारिन को प्रोत्साहित करने पर जोर देगा।

पूरे देश में एक ही भाषा को धाराप्रवाह तरीके बोलने के व्यावहारिक लाभ होने के बावजूद चीन में मंदारिन को प्रोत्साहन हमेशा विवाद का विषय रहा है। कुछ मामलों में तो ङ्क्षहसक घटनाएं भी हुई हैं। तिब्बत के निवासी स्कूलों में मंदारिन बोलने का विरोध करते हैं। वर्ष 2010 में गौंगझाउ प्रांत में इसके खिलाफ हजारों लोगों ने सडकों पर प्रदर्शन किया था।

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