पाकिस्तान की रातों में रफ्तार घोलते ये सवार..

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Sunday, September 08, 2013-5:51 PM

इस्लामाबाद: शनिवार यानि हफ्ते भर की भागमभाग के बाद सुकून भरे लम्हों को बांहों में भरने को बेताब जिंदगी। लेकिन इस्लामाबाद शहर की रातों को ये सुकून नसीब कहां? शनिवार की रात। घंटाघर की घड़ी ने टन टन कर आधी रात बीतने की मुनादी की नहीं कि शहर की सड़कें ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ वीडियो गेम की दुनिया में बदल जाती है। आधी रात में जब शहर नींद के आगोश में लिपटा है, सुनसान सड़कों पर आलीशान और भारी भरकम गाडिय़ों की झूंझूझूझूं शुरू हो जाती है।

ये दुनिया है पाकिस्तान के जवां और दौलतमंद नौजवानों की जो रात के सीने पर अपनी तेज रफ्तार गाडिय़ों को दौड़ाएंगे। पाकिस्तान में ये एक नई रवायत शुरू हुई है जिसे नाम दिया गया है ‘अंडरग्राउंड स्ट्रीट रेसिंग’। हिंदुस्तान की तरह यहां भी स्ट्रीट रेसिंग गैर कानूनी है लेकिन युवा जाबांज पूरे जुनून के साथ रात भर सड़कों पर दौड़ते फिरते हैं। हिंदुस्तान की तरह पाकिस्तान में भी कार रेसिंग एक खौफनाक शौक है। रात में जब शहर सो जाता है तो ये रईसजादे अपनी माज्दा आरएक्स 7, टोयोटा सुप्रास, बीएमडब्ल्यू, हमर और होंडा सिविक को लेकर रेस लगाते हैं। इसे कहते हैं ‘ड्रैग रेस।’

जब ये 10 , 20 कारें रात के अंधेरे में निकलती हैं तो इस्लामाबाद की सड़कें किसी हालीवुड फिल्म से लिए गए सीन की तरह दिखती हैं। एक पूर्व रेसर और साफ्टवेयर प्रोफेशनल अली ने प्रेट्र को बताया, ‘इस प्रकार की रेस आधी रात के बाद या तड़के होती हैं जब सड़कें खाली रहती हैं। ये रेस केवल इस्लामाबाद में ही नहीं बल्कि कराची और लाहौर में भी हेाती हैं।’ रेसरों के इस समूह में 20 से 35 साल के युवा शामिल हैं और अधिकतर सभी खाते पीते घरानों से आते हैं। शादी के बाद रेसिंग छोडऩे वाले अली फेसबुक पेज ‘इस्लामाबाद अंडरग्राउंड रेसिंग’ पर काफी सक्रिय हैं।

इस प्रकार की रेसों में किसी प्रकार के इनाम के बारे में पूछे जाने पर अली बताते हैं, ‘कोई तय इनाम नहीं होता। दो रेसर चाहें तो कुछ तय कर सकते हैं। लेकिन इन दिनों एक नई चीज चली है जिसे ‘पिंक स्लिप’ कहा जाता है । यानि जीतने वाला रेसर हारने वाले की कार रख लेता है।’ उसके फेसबुक पर रेस की सैंकड़ों तस्वीरें और वीडियो हैं जिन्हें दो हजार से अधिक लोगों ने लाइक किया है। 19 वर्षीय अर्सलान मुस्तफा कहते हैं , ‘स्ट्रीट रेसिंग 2000 में शुरू हुई थी।

यह वह दौर था जब लोगों ने अपनी होंडा सिविक को मोडिफाई कराना शुरू किया था।’ उन्होंने बताया कि दिसंबर 2010 में ऐसी ही एक रेस के दौरान पांच लोग मारे गए थे। जिसके बाद अदालत और पुलिस ने इस प्रकार की रेस पर सख्ती करना शुरू कर दिया। 2012 में ये एक प्रकार से बंद हो गयीं लेकिन अब फिर से रेसिंग शुरू हो गई है। मुस्तफा चाहते हैं कि सरकार उनके लिए उचित रेसिंग ट्रैक बनाए ताकि युवा एक सुरक्षित और वैध माहौल में रेसिंग कर सकें।


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