अब इग्लैंड में बस्ते का बोझ कम करने की कवायद

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Friday, September 13, 2013-3:30 PM

लंदन: छोटे बच्चों के कंधों पर बस्ते के बढते बोझ को कम करने की जरूरत भारत में ही नहीं लंदन में भी महसूस की जा रही है। शिक्षाविदों का मानना है कि बच्चों के लिए बनी शिक्षा नीति न सिर्फ उनकी सेहत खराब कर रही है बल्कि उनका सुकून भी छीन रही है। इग्लैंड के 100 से अधिक शिक्षाविदों और लेखकों ने विदेश मंत्री माइकल कोव को एक पत्र लिख कर कहा है कि कम उम्र के बच्चों को विधिवत शिक्षा देने की बजाए उन्हें खेल-खेल में शिक्षा दी जानी चाहिए।

टेलीग्राफ में छपे इस पत्र में लंदन स्कूल ऑफ इकानमिक्स में वेलबीइंग प्रोग्राम के निदेशक, इंग्लैंड के पूर्व बाल आयुक्त सर अल एनस्ले, ग्रीन सहित करीब 127 जाने माने व्यक्तियों के हस्ताक्षर है। इसमें कहा गया है कि हाल ही में हुए शोध यह दर्शाते है कि बहुत जल्दी पढाई शुरू करने की बजाए शिक्षा देने के तरीके में बदलाव की जरूरत है। पत्र में कहा गया है, ‘बहुत कम देश ऐसे है जहां हमारे देश की तरह चार वर्ष में बच्चे की पढाई शुरू कर दी जाती है। ऐसा देखा गया है कि जिन बच्चों को कई वर्ष तक अच्छी निर्सरी शिक्षा के बाद छह या सात वर्ष की उम्र में स्कूल में दाखिला दिया जाता है वे लगातार बेहतर परिणाम देते हैं और उनकी सेहत भी अच्छी होती हैं।’


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