देश में एक बार फिर आएगा तालिबान का राज!

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Sunday, September 15, 2013-5:03 PM

अकोरा खट्टक: तालिबान के जनक कहे जाने वाले मौलाना समी उल हक के लिए अफगानिस्तान में तालिबानी हमले आतंकवाद नहीं, आजादी की लडाई है, और उसे उम्मीद है कि विदेशी सेना के वहां से जाते ही देश में एक बार फिर तालिबान का राज आएगा। अकोरा खट्टक के पास अपने आवास पर बात करते हुए मौलाना समी ने कहा कि उन्हें (तालिबान को) एक साल का समय दीजिए और वे अफगानिस्तान के लोगों को सुखी कर देंगे।

पूरा अफगानिस्तान उनके साथ होगा। अमेरिकियों के देश छोडने के साल भर के भीतर यह सब होगा। मौलाना समी ही वह शख्स था जिसके दारुल उलूम हक्कानी विश्वविद्यालय से 1990 के दशक में तालिबान ‘पोस्तो में इसका अर्थ छात्र होता है’ मूवमेंट की शुरुआत हुई। इस विश्वविद्यालय को चरमपंथी इस्लाम की पाठशाला भी कहा जाता है।

दारुल उलूम से पढाई पूरी करने वाले कई छात्रों ने 1980 के दशक में कलम छोडकर बंदूक उठा ली थी और सोवियत सेना से लड़ रहे मुजाहिदीनों का साथ देने के लिए अफगानिस्तान पहुंच गए। सोवियत सेना के 1989 में अफगानिस्तान छोडने के बाद तालिबान मूवमेंट की नींव रखने वाला मुल्ला मोहम्मद उमर भी मौलाना के शागिर्दों में से एक था। मौलाना उसे अपने सबसे काबिल शागिर्द बताते हैं और उसकी तारीफों के पुल बांधते नहीं थकते।


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