पाकिस्तान तालिबान से वार्ता के मामले पर सेना और सरकार में टकराव

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Saturday, September 21, 2013-3:00 AM

इस्लामाबादः पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार जब लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के बाद दूसरी निर्वाचित सरकार सत्ता में आई तो ऐसा लग रहा था कि अब पाकिस्तान में सेना के शासन के दिन लद गए और दोनों में आपसी सुलह हो गई है।

लेकिन कुख्यात आतंकवादी संगठन पाकिस्तान तालिबान के मुद्दे पर सेना और नवनिर्वाचित सरकार के जुदा जुदा राय को देखते हुए सेना और सरकार के बीच सुलह के मंसूबे पर जैसे पानी फिर गया है। दरअसल प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार आतंकवादियों को बातचीत के रास्ते से मनाना चाहती है लेकिन सेना अपने पुराने अनुभवों के आधार पर बातचीत के विकल्प को कोरी बकवास मानती है।

गत मई में सत्ता में आए श्री शरीफ ने बातचीत के रास्ते आतंकवादियों को काबू में करने की बात की थी लेकिन इसके कुछ दिन गत रविवार को सड़क किनारे लगाए गए बम में हुए विस्फोट में जब सेना के एक जनरल और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी की मौत हो गई तब आतंकवादियों से शांतिवार्ता की बात सेना को पूरी तरह बेमानी लगने लगी।

अब तक सेना ने आतंकवादियों के साथ शांति वार्ता के मसले पर शरीफ की सरकार से सीधा जवाब तलब नहीं किया है लेकिन ऐसा माना जा रहा है जल्दी ही स्थिति नया रूख लेगी। कबाइली इलाके में सेना के हजारों जवान तैनात हैं और सेना का मानना है कि पहले भी जब जब आंतकवादियों से बातचीत करने की कोशिश की गई, तब तब हाथ में सिर्फ असफलता आई।

सेना के मुताबिक अभी तक बातचीत के कोई आसार नहीं नजर आ रहे लेकिन उनके हमले बदस्तूर जारी हैं। सेना और सरकार के बीच तनाव ऐसी स्थिति में और भी खतरनाक मोड ले सकता है जब नवंबर में मौजूदा सैन्य प्रमुख अशफाक कयानी सेवानिवृत होने वाले हैं।


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