ईरानी नेता कुछ ही माह में परमाणु समझौते के इच्छुक

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Thursday, September 26, 2013-12:11 PM

वॉशिंगटन: ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी देश के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तीन माह में ही समझौता चाहते हैं और इसके लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नेता अली खमेनी का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। वॉशिंगटन पोस्ट को दिए गए एक साक्षात्कार में रूहानी ने कहा कि वह परमाणु करार के लिए तीन से छह माह   का समय तय करना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान चाहता है कि प्रक्रिया वर्षों की नहीं बल्कि कुछ ही महीनों की हो। उन्होंने अखबार से कहा ‘‘परमाणु मुद्दे पर हमें एक तर्कसंगत समय में समाधान की जरूरत है।’’

रूहानी के अनुसार, उनकी सरकार का निर्णय है कि परमाणु मुद्दे का हल शीघ्र आवश्यक है। इसके लिए तीन से छह माह का समय ठीक है, न कि वर्षों का। समझौते के लिए खमेनी के समर्थन के बारे में पूछे जाने पर रूहानी ने कहा ‘‘परमाणु मुद्दे का हल मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। ‘‘मेरी सरकार को परमाणु वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए पूरा अधिकार है।’’अमेरिका, अन्य पश्चिमी देशों और इस्राइल को संदेह है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम की आड़ में परमाणु बम बना रहा है, लेकिन ईरान इसका खंडन करता रहा है।


ईरान में इस वर्ष के शुरू में हुए चुनावों में रूहानी के निर्वाचन के बाद से ही तेहरान और वॉशिंगटन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत मिलने लगे। बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में बैठक रूहानी ने टाल दी थी। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी और ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जारिफ आज ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस के अपने समकक्षों के साथ न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ईरान की परमाणु गतिविधियों पर चर्चा करेंगे।

रूहानी ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को ‘‘पारदर्शी’’ बनाना चाहता है ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वह आश्वस्त कर सके कि वह परमाणु बम नहीं बनाना चाहता। उन्होंने कहा ‘‘अगर पश्चिम जगत ईरान के कानूनी अधिकारों को मान लें तो फिर इस मामले में जरूरी पूर्ण पारदर्शिता तैयार करने में कोई बाधा नहीं है।’’ रूहानी ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक समझौते पर पहुंचना अमेरिका के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है। वर्ष 1980 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास में बंधक बनाए जाने की घटना के बाद वॉशिंगटन ने ईरान के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते खत्म कर लिए थे।

 


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