भारत अमेरिका ने सहयोग का संकल्प लिया

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Saturday, September 28, 2013-4:40 PM

वाशिंगटन: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अगले दशक में भी अपने संबंधों में समानरूप से सुधार करते रहने का संकल्प लिया है। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका के साथ अपनी इस तीसरी शिखर बैठक में पाकिस्तान से पैदा हो रहे आतंकवाद को केंद्र में रखा। इस शिखर बैठक से पहले जम्मू एवं कश्मीर के सांबा में हुए आतंकवादी हमले की छाया इस मुलाकात पर छाई रही और ओबामा ने आतंकवाद के खतरे पर भारतीय चिंता को स्वीकार किया। जबकि मनमोहन सिंह को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ प्रस्तावित अपनी मुलाकात से अब बहुत उम्मीदें नहीं रह गई हैं।

नवाज के साथ रविवार की मुलाकात के लिए उत्सुक मनमोहन सिंह ने ओबामा से कहा, ‘‘हमारे उपमहाद्वीप में आतंकवादियों की सक्रियता और पाकिस्तान में आतंकवादियों की उपस्थिति के कारण अपेक्षाएं काफी कम हो गई हैं।’’ आतंकवाद के खतरे बरकरार रहने पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए दोनों ने संयुक्त वक्तव्य में न सिर्फ 26 सितंबर के हमले की कड़ी निंदा की, बल्कि पाकिस्तान से नवंबर 2008 के मुंबई हमले के हमलावरों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने की मांग की। दोनों नेताओं ने आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट करने सहित आतंकवाद के लिए वित्तीय और सामरिक मदद बाधित करने के लिए संयुक्त और ठोस प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया।

 दोनों नेताओं ने अपने-अपने देशों के सामने मौजूद खतरों से निपटने के लिए सूचना का आदान-प्रदान पर्याप्त रूप से बढ़ाने का निर्णय लिया। इसमें ज्ञात और संदिग्ध आतंकवादियों के बारे में जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए द्विपक्षीय रिश्ते को मजबूत बनाना भी शामिल है। मनमोहन-ओबामा ने दोनों देशों के संबंधों में शिथिलता आने की खबरों के बीच असैन्य परमाणु समझौते के तहत पहला व्यावसायिक समझौता किया और रक्षा सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों देशों ने रिश्ते को विस्तार देने के लिए बाधाएं कम करने, व्यावसायिक लेन-देन को आसान बनाने, सह-उत्पादन और सह-विकास के अवसरों को अपनाने पर प्रतिबद्धता जताई।

भारत-अमेरिका के संबंधों में पिछले एक दशक में हुए सुधार का जिक्र करते हुए दोनों नेताओं ने अगले दशक को भी रिश्ते के लिहाज से समानरूप से सुधारात्मक बनाने और अपनी भागीदारी की पूर्ण संभावनाओं तक पहुंचने के लिए अपनी सरकारों को सजग करने का संकल्प लिया। संयुक्त वक्तव्य के मुताबिक, बैठक में सुरक्षा सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा एवं पर्यावरण, उच्च शिक्षा और वैश्विक ढांचे पर रोशनी डाली गई। मनमोहन-ओबामा ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, साइबर, अंतरिक्ष और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्रों में खड़ी 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने इस बात का भी उल्लेख किया कि 2001 से अब तक द्विपक्षीय व्यापार पांच गुना बढ़ कर 100 अरब डॉलर का हो गया है। दोनों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि द्विपक्षीय व्यापार में अतिरिक्त पांच गुना वृद्धि होने के रास्ते में कोई असाध्य बाधा मौजूद नहीं है।
इसके साथ ही दोनों नेताओं ने एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय निवेश संधि करने और द्विपक्षीय चिंता के सभी व्यापार व निवेश नीति से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए एक विनिर्माण में निवेश पर एक संयुक्त समिति गठित करने पर सहमति जताई। ताकि दोनों देशों में रोड़ों को साफ कर व्यापार का वातावरण सुधारा जा सके।
 


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