पाकिस्तान में लगी फांसी की सजा पर रोक

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Friday, October 04, 2013-4:38 PM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में नवाज शरीफ की सरकार लगातार आतंकियों की कमर तोडऩे के दावे कर रही है, परन्तु उनकी कार्यप्रणाली में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सरकार 2008 में पीपुल्स पार्टी सरकार द्वारा फांसी पर लगाई गई रोक को खत्म करने के वादे से पलट गई है।

पीएमएल-एन सरकार ने आतंकी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की लगातार धमकियों और आतंकी हमलों से घबराकर पीपीपी द्वारा लगाई गई रोक को बरकरार रखने का निर्णय किया है। पिछले हफ्ते पेशावर में हुए तीन आतंकी हमलों में लगभग 150 लोगों की मौत हो गई। 30 जून को पीपुल्स पार्टी द्वारा फांसी पर लगाई गई रोक खत्म हो गई थी। तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सरकार से इस रोक को बरकरार रखने की अपील की थी और नवाज सरकार ने यह अपील स्वीकार कर ली थी।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता उमर हमीद खान ने वीरवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के चलते हमने फांसी पर रोक का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने सत्ता में आने के बाद घोषणा की थी कि वह अपराधियों और आतंकियों में भय पैदा करने के लिए मौत की सजा फिर से शुरू करना चाहते हैं, जबकि पाकिस्तान की जेलों में 8,000 से अधिक लोग मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं।


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