पूर्वी एशियाई सम्मेलन में भारत को नालंदा विश्वविद्यालय के लिए समर्थन

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Thursday, October 10, 2013-2:49 PM

बंदर सेरी बेगवान: भारत की महत्वाकांक्षी नालंदा विश्वविद्यालय परियोजना के लिए समर्थन देते हुए छह देशों ने इस अकादमिक संस्थान के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई और अंतर-सरकारी सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू की। इन सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर पूर्वी एशियाई सम्मेलन में किए जा रहे हैं और सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परियोजना को समर्थन के लिए देशों के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘‘उत्कृष्टता के अंतरराष्ट्रीय संस्थान के तौर पर नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य से सहयोग के लिए पूर्वी एशियाई सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों का मैं आभार व्यक्त करता हूं।’’ 

सिंह ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय पर अंतर-सरकारी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस विश्वविद्यालय में अगले साल अकादमिक सत्र शुरू हो जाएंगे। मुझे उम्मीद है कि पूर्वी एशियाई सम्मेलन (ईएएस) देशों के छात्र और संकाय इसमें भागीदार होंगे।’’ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, कंबोडिया, सिंगापुर, ब्रुनेई, न्यूजीलैंड और लाओ पीडीआर शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय ख्याति के संस्थान के तौर पर नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना करने की भारत की योजना के लिए ये सहमति पत्र महत्वपूर्ण हैं।

आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशियाई सम्मेलन (ईएएस)में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री कल यहां पहुंचे। ईएएस क्षेत्र के विभिन्न देशों के आसियान के साथ सहयोग के लिए एक मंच है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, न्यूजीलैंड, रूस और अमेरिका के अलावा दस आसियान दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों का संघ (एएसईएएन) देश भी शामिल हैं। ये दस आसियान देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यामां, लाओस, फिलिपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं। नालंदा विश्वविद्यालय बिहार में इसी नाम से बनाया जा रहा है।

इसका निर्माण उसी जगह के समीप किया जा रहा है जहां इस ऐतिहासिक अकादमिक स्थल के अवशेष हैं। परियोजना से जुड़े लोगों में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन शामिल हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान को पुनर्जीवित करने का विचार वर्ष 2005 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा ए पी जे अब्दुल कलाम ने सबसे पहले दिया था। परियोजना के बारे में पूछे जाने पर आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इसमें अच्छी प्रगति हो रही है और समझा जाता है कि कम से कम छह देश इस विश्वविद्यालय के लिए कल एक अंतरसरकारी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

उन्होंने बताया, ‘‘यह पहला मौका है कि ईएएस में यहां ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं।’’ सूत्रों ने यह भी बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय गवर्निंग बोर्ड में ईएएस के पांच प्रतिनिधि होंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चीन ने परियोजना के लिए 10 लाख डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। सिंगापुर ने 50 से 60 लाख डॉलर, ऑस्ट्रेलिया ने करीब दस लाख डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह राशि स्वैच्छिक आधार पर दी जा रही है।


 


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