चार दिवसीय यात्रा समाप्त कर स्वदेश के लिए रवाना हुए मनमोहन

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Saturday, October 12, 2013-1:32 PM

जकार्ता: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ब्रुनेई और इंडोनेशिया की अपनी चार दिवसीय यात्रा समाप्त कर आज स्वदेश रवाना हो गए। मनमोहन ने अपनी इस यात्रा के दौरान भारत की ‘‘पूर्व की ओर देखो’’ (लुक ईस्ट) नीति को आर्थिक संबंधों से आगे बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक, आपदा प्रबंधन और भ्रष्टाचार से मुकाबले जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विस्तारित किया।

एशिया प्रशांत क्षेत्र के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के लिहाज से यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण थी । मनमोहन ने ब्रुनेई में आसियान और पूर्वी एशियाई सम्मेलनों के इतर जापान और आस्ट्रेलिया जैसी एशियाई महाशक्तियों के प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। मनमोहन ने दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के समूह आसियान के 10 सदस्य देशों के लिए पूर्णकालिक राजदूत के साथ अलग से एक दूतावास स्थापित करने की भी घोषणा की।

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि भारत-आसियान व्यापार को वर्ष 2015 तक 100 अरब डॉलर करने के लिए आसियान देशों द्वारा वर्ष 2013 के अंत तक सेवाओं और निवेशों पर एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये जाएंगे। प्रधानमंत्री आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नौ से दस अक्तूबर तक बु्रनेई दारूस्सलाम में थे।

पूर्वी एशिया सम्मेलन एशियाई देशों और उसके साझेदार देशों जैसे चीन, भारत, आस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं। ब्रुनेई के बाद प्रधानमंत्री इंडोनेशिया की अपनी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा के लिए 10 अक्तूबर को जकार्ता पहुंचे। प्रधानमंत्री यद्यपि बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए यहां तीन बार आ चुके हैं।

भारत और इंडोनेशिया के बीच छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए जिनमें स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार निरोधक, मादक पदार्थ, आपदा प्रबंधन और शिक्षा शामिल हैं। दोनों देश वार्षिक सम्मेलन आयोजित कर अपनी रणनीतिक सांझेदारी को विस्तारित करने पर सहमत हुए। संबंधों को बढ़ाने के लिए प्रतिष्ठित व्यक्तियों का एक समूह गठित किया जाएगा। दोनों देशों के बीच सहयोग के जिन क्षेत्रों की पहचान की गई है उनमें अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, जेहादी ताकतों से सीमा पार खतरा शामिल हैं।



 


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