हज के अंतिम चरण में यात्रियों ने शैतान को पत्थर मारे और कुर्बानी दी

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Thursday, October 17, 2013-1:46 AM

जेद्दा: सउदी अरब की मीना घाटी में आज दूसरे दिन एक लाख से ज्यादा भारतीयों सहित 10 लाख से ज्यादा हाजियों ने सांकेतिक रूप से शैतान को पत्थर मारे और हज यात्रा पूरी होने के अवसर पर कुर्बानी दी।

पत्थर मारने की परंपरा सभी प्रकार की बुराइयों को अस्वीकार करने और शापग्रस्त शैतान के किसी भी भुलावे में नहीं आने का वादा करने की रीति है। मीना घाटी में हाजियों ने एक साथ ‘अल्ला हो अकबर’ का नारा लगाते हुए वहां स्थित खंभे को पत्थर मारे। इस खंभे को शैतान का प्रतीक माना जाता है। पत्थर मारने की रस्म कल शुरू हुई और आज भी बड़ी संख्या में सफेद वस्त्र पहने लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।

पत्थर मारने के बाद हाजियों ने कुर्बानी दी। इसी दिन पैगंबर इब्राहिम ने अल्लाह के लिए अपने इकलौते बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने की इच्छा जतायी थी। इसकी याद में ही आज कुर्बानी दी जाती है। इस पत्थर मारने की परंपरा का अर्थ है उस शैतान को पत्थर मारना जिसने पैगंबर इब्राहिम को खुदा के आदेशों को नहीं मानने और अपने बेटे को कुर्बान करने से रोकने की कोशिश की थी। पैगंबर ने उसे पत्थर मार कर भगाया था।

ईद-उल-अजहा (बकरीद) पैगंबर इब्राहिम के साहस को सलाम करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष करीब 15 लाख लोग हज यात्रा पर आए हैं। सउदी अरब पहुंचे 188 देशों के मुसलमानों में 1,00,200 भारतीय मुसलमान भी हैं। हज इस्लाम के उन पांच कर्मों में से है जिसे प्रत्येक वित्तीय और शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति को जीवन में एक बार करना जरूरी माना जाता है। इस वर्ष हज 18 अक्तूबर को समाप्त हो रहा है।


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